भारत युद्ध के रास्ते पर नहीं, हर हालात से निपटने को सेना तैयार-सीतारमन

ग्वालियर। भारत युद्ध के रास्ते पर नहीं चल रहा, लेकिन अगर युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो हर परिस्थिति से निपटने के लिए हमारी सेना तैयार है। भले ही सीज फायर की घटनाएं हो रही हों, लेकिन ऐसा नहीं कि हम एक्शन नहीं ले रहे। हम व्यापक स्तर पर आतंकवाद से निपटने के तरीके अपना रहे हैं। इसका परिणाम दिख भी रहा है कि हमारी सेना आतंकियों को खत्म करने में सफल हो रही है।

यह बात देश की पहली महिला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने एयरफोर्स की सेन्ट्रल एयर कमांड ग्वालियर स्थित एयरफोर्स स्टेशन का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। बोफोर्स सौदे के तीन दशक बाद अमेरिका से खरीदी गई अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोप एम-777 के ट्रायल के दौरान फेल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। हम हर पहलू से इसका परीक्षण कर रहे हैं।

सेना में सैनिकों के भोजन, अवकाश और अन्य समस्याओं से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद इस बात को कहते हैं कि आखिरी जवान तक को सारी सुविधाएं मिलना चाहिए। असला, बास्र्द की कमी आए, लेकिन सेना के जवानों को कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। चीन, पाकिस्तान से लगातार चुनौती मिलने के बाद भी विदेशी तकनीक पर निर्भरता और फ्रांस से राफेल खरीदी में हो रही देरी पर रक्षा मंत्री ने कहा कि बुधवार शाम को ही फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस ने मुझसे फोन पर बात की। फ्रांस के साथ हमारा सेना समन्वय बेहतर है। जल्द ही राफेल भारत आएगा।

सेना में महिलाओं की भागीदारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर विचार चल रहा है। हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। सेना में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। वन रेंक वन पेंशन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में हाल ही में तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा सचिव से बात हुई है। रक्षा मंत्री के साथ सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा और एयर कमोडोर एचए राथेर भी मौजूद थे।

कार्यालय में बैठकर कागजों में नहीं चलाना मंत्रालय

एक सवाल के जवाब में निर्मला सीतारमन ने कहा कि रक्षा मंत्री बनने के अगले दिन से ही मैं लगातार वायु सेना, नौसेना के अलग-अलग कैंप के दौरे कर रही हूं। गुस्र्वार को भी वाराणसी में एक कार्यक्रम में जाना था। इसके साथ ही उन्होंने सेन्ट्रल विंग के महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन का दौरा करने का कार्यक्रम बनाया। मुझे कार्यालय में बैठकर कागजों में मंत्रालय नहीं चलाना। इसलिए लगातार दौरे कर सेना अधिकारी, सैनिकों से मिल रही हूं। प्रधानमंत्री ने ही मुझे कहा है कि हर जगह जाऊं। सेना अधिकारी, सैनिकों की राय लेकर उनकी समस्याएं सुन रही हूं। रक्षा मंत्रालय निश्चित ही चैलेंजिंग है।

मुझे नहीं पता था रक्षा मंत्री बनूंगी

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री अस्र्ण जेटली का फोन आया तब उन्हें पता लगा कि रक्षा मंत्री बनाया गया है। हिंदी दिवस पर रक्षा मंत्री ने पत्रकारों से हिंदी में ही बात की। उन्होंने इससे पहले कहा भी कि उनकी व्याकरण जरुर खराब है, लेकिन वह हिंदी में ही बात करेंगी।

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