समाजसेवा के गगन का एक चमकता सितारा बना दौसा का बेटा समाजसेवक रोहित शर्मा

नाम       –      रोहित शर्मा

जन्म   –10 नवम्बर 1996

जन्मस्थान–    दौसा(राज.)

पिता का नाम – हितेन्द्र मोहन शर्मा

माता का नाम–उर्मिला देवी

रुचि–   समाजसेवा , कविता लेखन,गाने गाना, ज्योतिष

सपना   –   इंसानियत को हरचौखट तक ले जाना

डायरेक्टर-आर.के. मिनरल्स बापी,दौसा(राज.)

संस्थापक व प्रदेशाध्यक्ष – मिशन हैल्पलाईन कोर कमेटी,राज.

इंसानियत हर व्यक्ति के दिल पर दस्तक दे प्रत्येक व्यकित इंसानियत का पुजारी बने, राजनिति की जगह युवा समाजसेवा के क्षेत्र मे अग्रसर हो ,नारी का सम्मान हो,जरुरतमंदो को सहायता मिले, बेजुबानो के दुख दर्दो के लोग मसीहा हो, इस प्रकार कि सोच एक साधारण परिवार मे जन्मे एक लडके कि है, जो एक समाजसेवी बन कर देश मे इंसानियत कि नयी ज्योत जलाना चाह्ता है, महिलाओ को आत्मनिर्भर बनाना चाहता है, गर्त मे जा रही आधुनिक युवा पीढी को इंसानियत का रक्षक बनाना चाहता है, जिससे दिनो दिन अंतिम सांसे गिनती इंसानियत का पुनर्जन्म हो । देवनगरी के नाम से पहचान रखने वाले दौसा जिले मे  जन्मा रोहित शर्मा देश मे इंसानियत कि पुनर्स्थापना चाहता है।                        

मनुष्य को हमारे शब्दकोष मे इंसान कहा गया है। तीन शब्दों का यह शब्द ‘इंसान’अपने आप मे एक विश्व शक्ति है,और इसी इंसान से जन्म होता है उस धर्म का जिस पर आज सम्पूर्ण विश्व टिका हुआ है, उस महाधर्म को हम ‘इंसानियत’ कहते हैं। अगर यह धर्म ना हो तो मनुष्य नरभक्षी बन जाये,जो कि आज हमे देखने को मिल रहा है। इस धर्म के विस्मरण को ही हम अगर महाप्रलय कि प्रथम सीढी कहे तो सायद कोई अतिशयोक्ति नही होगी, सायद इसलिये ही कहा जाता रहा है “इंसानियत परमोधर्म:”। यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि आज धर्म केवल हिंदू, मुस्लिम, सीख, इसाई यही चार रह गये हैं,इंसानियत धर्म लोगो के दिलो से ओझल होता जा रहा है। कल तक जिनके दिलो मे यह धर्म मुख्यधारा   मे था उन्हे इंसान कहते हैं और आज इस धर्म के अनुयायियो को हम समाजसेवी कहने लगे  हैं, यही वर्तमान समय कि सबसे बडी बिडंमबना  है । आज  सडको  पर एक व्यक्ति खून से  लथपथ पडा होता है और वहा से हजारो वयक्ति गुजर जाते हैं,लेकिन कोई इंसानियत का पुजारी उसकी सहायता के लिये आगे नही आता है। आज,एक अखबार का एक बहुत बडा भाग इंसानियत को शर्मिंदा करने वाले कृत्यो से रंगीन होता है,मगर अगर हम उसी अखबार मे इंसानो को ढूंढते हैतो वो एक कोने मे हमे दिखाई देते हैं.सामाजिक परोपकारी कार्यक्रमो कि खबरो के माध्यम से पता चलता है,कि इंसान भी कुछ तो मौजूद है। इस विंडमबना को दूर करनेके लिये हमारे देश मे भी अनेको सपूत पैदा हुएहैं, जिनके प्रयासो से अनेको बार इंसानियत कि जीत हुयी है। ऐसे सपूत बार बार  इंसानियत  कि  पुनर्स्थापना करते हैं। ऐसे लोग बिरले होते हैं जो ऐसे सपने सोचते हैं और उनको पूरा भी करते हैं कि देश मे परोपाकार    कि  भावना   हो , सम्मान हो,समर्पण हो।नारी का सम्मान हो,वह आत्मनिर्भर बने,दीन दुखियो कि लोग मदद करे,बेजुबानो के दर्द को भी महसूस कर दूर किया जाये। बुराईयो के प्रति भयंकर बिरोध हो। इसी प्रकार की सोच साधारण परिवार मे जन्मे एक लडके कि है,जो एक इंसानियत कि मिशाल वन कर देश मे इंसानियत कि लहर लाना चाहता है।इंसानो को अपने इंसानियत धर्म का अहसास वो दिलाना चाहता है,वो चाहता हैकि दीन दुखियो के लिये सैकडो लोग मशीहा बन कर आगे आये,देश मे महिलाओ कि तस्वीर बदले,जिसमे वो आत्मनिर्भर और सशक्त दिखाई देवे,युवा इंसानियत धर्म के कट्टर अनुयायी बनें,जो.इंसानियत की भावना का विकास करें। बल्कि इंसान ही नहीं बेजुबान पशु पक्षियो को भी वो उनके हितो मे बुलंद आवाज दिलाना चाहता है। राजस्थान के देव नगरी दौसा जिले मे जन्मा रोहित शर्मा देश मे इंसानियत को नयी पहचान दिलाना चाहता है। बुलंद हौसलो के साथ रोहित शर्मा ने जागरूक जनता समाचार पत्रके साथ साझा किये अपने विचार,उद्देशय एवं परिचय......

आपकी शुरुआती शिक्षा कहा हुयी?

 मे 6ठी तक एक अंग्रजी माध्यम विध्याल्य ऐबेनेजर पब्लिक स्कूल मे पढा। दशवी आदर्श विद्या मन्दिर,जयपुर रोड दौसा से की। बचपन से होनहार था,पर दशवी बाद पढायी मे रुचि कम हुयी, फलस्व रूप इम्पल्स से बारहवी मे फेल हो गया। फिर निराशा के साथ जयपुर चला गया,वहा रावत पब्लिक स्कूल से बारवही अच्छे अंको से पास की। फिर जनसेवा के उददेश्य से राजस्थान कोलेज ओफ नर्सिंग,दौसा मे दाखिला लिया,जहा अध्ययन जारी है। मेरे जीवनपथ के मुख्य गुरु योगीनंदकिशोर शर्मा रहे हैं।

समाजसेवा के अलावा आप क्या करते हैं?

मे एक व्यवसायी हूँ, बापी मे मेरी आर.के.मिनरल्स नाम से इंडस्ट्री है।इसके अलावा मे नर्सिंग भी कर रहा हूँ। समय की जब पुकार होती हैंतो मे कविताये भी लिखता हूँ,जिनके माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास करता हूँ। इसके अलावा संगीत मे मेरी विशेष रूचि है, अनेको बार सार्वजनिक मंचो पर मेने गाने गाये है।ज्योतिष मे भी विशेष रूचि हैं ।

आपके सामाजिक योगदान क्या रहे हैं?

17 वर्ष की उम्र मे ही मेने समाज के प्रति अपने आपको समर्पित कर दिया था। शुरुआत मे एक वर्ष छात्र राजनिति मे रहा,लेकिन राजनीति की वास्तविकता का जब परिचय हुआ तो स्वयंप्रेरणा से सब कुछ छोड कर समाज की सेवा मे आगे आया। शुरुआत मे परिण्डा अभियान का आगाज किया 500 परिण्डे लगवाये, फिर वृक्षरोपण अभियान चलाया, जिसमे सैकडो वृक्ष लगावाये। उसके बाद बेटी बचाओ अभियान कि शुरुआत कि,विशाल रैलिया कि,गाँवो और कच्ची बस्तियों मे जाकर जन समुदाय को बेटीयो के प्रति जागरुक किया। नवम्बर 2015 मे सामाजिक सहायर्ताथ एक संगठन तैयार किया, जो कि जरुरतममंद लोगो को मदद करने के लिए विशेषदल के निर्माण करने के उद्देश्य को लेकर था, जिसका नाम मिशन हैल्पलाईन कोर कमेटी रखा गया, जो दौसा से शुरु होकर अलवर सहित अनेको जिलो मे जनकल्याण के उद्देश्य से पहुची । जिसके नेततृत्व मे नारी स्वतंत्रता आंदोलन चलाया,जिसमे कन्या आत्मरक्षा शिविर लगावाये गये,जिनमे सैकडों बेटियो को आत्मरक्षा के गुर सिखाये गये। जागरुकता हेतु रैलिया व अने को कार्यक्रम करवाये। एक बार गौ तस्करो का पर्दाफाश करवा 39 गायो को उनकी कैद से छुडवाया। अबतक 5 रक्तदान शिविरो का आयोजन करवाया जिनमे लगभग 250 युनिट रक्त एकत्रित हुआ,साथ ही इतना ही रक्तदान आपातकालीन परिस्थितियो मे तडपते मरीजोके ओनकाल डोनेशन द्वारा करवाया । 2015 एवं 2016 मे ठण्ड से ठिठुरते 10000 से अधिक निर्धन बच्चो,महिलाओ व बुजुर्गो को वस्त्रदान करवाया । साथ विगत दोनो मकर सक्रांति पर पक्षियो के लिये सहायता शिविर लगवाये जिनमे सैकडो पक्षियो का उपचार हुआ । विगत वर्ष भी सैकडो परिण्डे व वृक्ष लगावाये,इस वर्ष भी अभियान प्रारम्भ हो चुका है जिसमे 2100 परिण्डे व 2100 पौधे लगाये जायेगे। साथ ही अब तक सैकडो लावारिस घायल व बी मार गौवंशो का उपचार करवाया गया, इसके अलावा भी अनेको सामाजिक कार्यक्रमो का आयोजन अब तक करवाया गया।

आपका स्वपन क्या है?

मेरा स्वपन है कि कि मे इंसानियत के लिये एक मिशाल बनूँ । मेरी पहचान एक इंसान के रुप मे हो,और इसी पहचान को लेकर देश में एक विशाल संख्या मे टीम तैयार हो,जो इंसानियत कि पुनर्स्थापना करे एवं गर्व से कहे “हम है इंसान”। समाज मे व्याप्त बुराईयो का नाश कर सकूं, महिलाओ को सम्मान दिलवा सकूं,वो आत्मनिर्भर बने । व्यक्ति के वल इंसानो का ही नहीं बल्कि बेजुबान पशुपक्षियो का भी मित्र बने ऐसा माहौल मे बनाना चाहता हूँ,मे चाहता हूँ कि जब अस्पताल मे मरीज को खून की जरूरत पडे तो उसके लिये दस लोगरक्त देने को तैयार बैठे हो।

इससफर मे आपके मुख्य सहयोगी कोन है?

मेरे माता पिताने मेरा इसमे सबसे ज्यादा सहयोग किया। सबसे ज्यादा सहयोग इसमे मेरी माँ का रहा हैं,  मे समाज हितो मे हर तरह से तैयार रह सकूं इसलिए मेरे पिताजी ने मुझे 19 वर्षकि उम्र मे अपना व्यापार संभला दिया। साथ ही मेरे गुर योगी नंदकिशोर जी शर्मा,मेरे शिक्षक,मेरे मामा अनेश शर्मा व चाचा ऋषभ शर्मा,मार्गदर्शक मनोज पाराशर ,संजय शर्मा,विष्णु गौतम, मेरे मित्र व सलाहकार अरविंद जांगिड,रवि शर्मा,प्रशान्त उपमन्यु,अर्जुन सिंह,सौर्य जैमन सहित अनेको मित्रो के सहयोग सेमे इस पथ प्रर निरंतर मंजिल कि और अग्रसर हूँ।

आपको लगता इतने कठिन लक्ष्य को आप प्राप्त कर पाओगे?

मेरा मानना हैकि अगर आप सपने देखते ही है तो आपको बडे से बडे देखने चाहिए, क्युकि उन बडे सपनो कि चाह मे हम अनेको छोटे लक्ष्य आसानी से भेद जाते हैं। अपने मित्रो के सहयोग से मे पूर्ण इमानदारी से अपने इस लक्ष्य के प्रति समर्पित हूँ,सफलता की पूर्ण आशाओ के साथ। मे कर पाऊगा या नही ये मे नही जानता,बस इतना जानता हूँ कि जाते जाते दुनिया को एक माहौलदे जाउंगा,जो इंसानियत के इतिहास मे एक मिशाल होगा।

यह सोच है राजस्थान के एक युवा समाजसेवी रोहित शर्मा की, आज रोहित अपनी इसी सोच के कारण अनेको युवाओ के प्रेरणास्त्रोत है,जिसके फलस्वरूप आधुनिक दुनिया मे ऐसी भव्य सोच रखने वाले रोहित शर्मा,आज अपने मुकाम को पा चुके हैं, सैंकडो युवाओ को रोहित देश व समाज के सेवक बना चुके हैं । समाज के प्रति इसी समर्पण को देखते हुये अनेको बार रोहित अनेको सामजिक मंचो पर अनेको जनप्रतिनिधियो व प्रशासनिक अधिकारियो द्वारा सम्मान प्राप्तकर चुके हैं ।

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