तिथियों की घट-जोड़ का असर, देवउठनी ग्यारस के बाद विवाह मुहूर्त का रहेगा इंतजार

हिन्दू पंचाग और ग्रह नक्षत्रों की गणना के अनुसार आम तौर पर शादियों के मुहूर्त देवउठनी एकादशी(देव प्रबोधिनी) के बाद शादी-विवाह का सिलसिला शुरू हो जाता है, लेकिन अधिक मास होने के कारण इस बार विवाह के इतंजार में बैठे युवक-युवतियों एवं परिवारों को देवउठनी ग्यारस के एक माह बाद तक शुभ मुहूर्त का इतंजार करना पड़ेगा। ज्योतिषी पंचाग गणना के अनुसार हर तीन साल में तिथियों की घट-बढ़ के कारण अधिक मास पड़ता है। इस साल में देवउठनी ग्यारस के बाद देरी से मुहूर्त का संयोग बनता है। दरअसल तिथियां सूर्य के अनुसार चलती हैं। वर के लिए सूर्य बल और कन्या के लिए गुरू बल और दोनों के लिए चंद्र बल देखकर तिथि निकाली जाती है। इस साल 16 नबंबर के बाद से वृश्चिक के सूर्य होंगे।

19 को वृश्चिक राशि के अनुराधा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश के बाद श्रेष्ठ  मुहूर्तः

मान्यता है कि भगवान विष्णु के निद्रा के जागने के दिन से विरात्रि पूर्ण व्रत पूरा होने के साथ तुलसी शालिग्राम विवाह से मंगल बंधन शुरू होते हैं, लेकिन इस बार ऐसा बिल्कुल नहीं है। दीपावली से 11 वें दिन यानि देवउठनी एकादशी 31 अक्टूबर से विवाह शुरू नहीं होंगे। ऐसा इसलिये होगा, क्योंकि गणनाओं के अनुसार वृश्चिक राशि के अनुराधा नक्षत्र में में सूर्य का प्रवेश 19 नवम्बर को होगा, सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश के साथ ही 19 नवम्बर से शुभ मुहूर्त में शादियां आरंभ होंगी।

एक संयोग ऐसा भी की 2017 और 2018 में शादियों के महूर्त 19 नवम्बर से

अगले साल 2018 में भी शादियां 19 नवम्बर से आरंभ हो रही हैं। खास बात ये है कि अगले साल 19 नवम्बर को ही देवउठनी एकादशी है। इस वर्ष शादियों के लिये नवम्बर और दिसम्बर को मिलाकर केवल 14 मुहूर्त ही हैं। शादियों में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। विवाह यदि शुभ योग में हो तो उसके परिणाम भी बेहतर और समृद्घिकारक होते हैं। जीवन में विवाह के बाद बदलाव आते हैं। इस बार 22, 23, 29 ,30 नवम्बर 01,दिसम्बर को विशेष मुहूर्त में सबसे अधिक शादियां होने वाली हैं।

वर्ष में  विवाह के 02 अबूझ मुहूर्त

सनातन धर्म में दो मुहूर्त ऐसे बताये गये हैं जिनमें विवाह करने से किसी पंडित और विद्घान से पूछने की जरूरत नहीं है। ग्रीष्म काल में अक्षय तृतीया को और बारिश की समाप्ति और शीत ऋतु के आरंभ होने पर देवउठनी या देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी शालिग्राम विवाह के साथ शादियां की जायें तो मुहूर्त पूछने की आवश्यकता नहीं होती। इस साल भी ऐसे अनेक परिवार हैं, जो आगे ज्यादा मुहूर्त न होने पर खास तौर पर एकादशी के दिन शादियां करने वाले हैं। सूर्य गणना से अलग ये विवाह मुहूर्त माने जाते हैं। विनायक चौथ व्रत 22 नवम्बर को है। 23 नवम्बर को श्रीराम जानकी विवाहोत्सव है, इस दिन विवाह पंचमी भी है। इस विशेष मुहूर्त में अनेक शादियां हैं। 29 नवम्बर को इसके बाद मोक्षदा एकादशी के गीता जयंति को अधिक शादियां होंगी। वैसे नवम्बर में विवाह के 08 और दिसम्बर में 06 मुहूर्त हैं। कुल मिलाकर शीत ऋतु के इन दिनों में केवल दो सप्ताह ही शादियां होंगी।

वर्ष 2018 के विवाह मुहूर्त

जनवरी माह के विराम के बाद फरवरी में फिर शादियां आरंभ होंगी।

इसमें फरवरी में 04, 05, 07, 08, 09, 11, 18, 19,

मार्च में 03, 04, 12

अप्रैल में 19, 20, 25, 27

मई में 02, 04, 06, 11, 12, 13,

जून 18, 21, 23, 29, 30,

जुलाई 05, 06, 07, 11, 15, 16, 18, 19, 20, 21, 22

इनके बाद  अगले साल 19 नवम्बर से फिर शीत ऋतु में शादियां आरंभ होंगी।

-पं. अक्षय शास्त्री

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