शौचालय तो इन कुत्तों के लिए भी होने चाहिए!

जानवरों को पालने का शौक तो काफी पुराना है। पहले राजा-महाराजा शेर भी पाला करते थे। कुछ दिन पहले तक अलवर राजघराने में एक पालतू शेरनी थी जो काफी मशहूर थी। इसी प्रकार कई लोगों को शेर, हाथी, कुत्ते, बिल्ली, तोता, बन्दर, रंग-बिरंगी चिडिय़ा रालने का शौक है। मगर आजकल रंग-बिरंगी मछलियां को पालने का शौक भी काफी लोगों को हो गया है। कहते हैं कि कई फकीर और पंडित लोगों के कहने पर इन मछलियों को पाला जाता है जिनका आशय आय में बढ़ोतरी होना बताया जाता है। ये कहां तक सही है ये तो पालने वाले लोग ही बता सकते हैं। खैर हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो स्वच्छ भारत अभियान चलाया है उसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। मगर इस अभियान का असर कुत्ते पालने वाले लोगों पर नहीं पड़ा है या हमें दिखाई नहीं दे रहा है। कुछ तो है ही। हम तो जब प्रात:काल भ्रमण के लिए जाते हैं तो कई मैम और कई साब लोग अपने-अपने कुत्तों को रस्सी या सांकल से बांधे हुए कोई-कोई मैम तो गोद में लिए हुए ही घूमते नजर आ जाएंगे और जब कुत्ते को पोटी जाने की  इच्छा होती है तो उसे ये लोग इधर-उधर सड़क किनारे या पार्क के किसी कोने में या कहीं भी जहां इनकी इच्छा होती है लेकर खड़े हो जाते हैं और कुत्ताजी अपनी शौच से निवृत्त हो जाते हैं। मैम साब या साब इन्हें दुलारते हुए आगे बढ़ जाते हैं। क्या इन्हें खुले में शौच कराने की छूट है। ये इन्हें खुले में शौच कराते वक्त अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। गौरवान्वित इसलिए नहीं कि इन्हें किसी ने टोका नहीं, बल्कि गौरवान्वित इसलिए कि इन्होंने कुत्ता पाल रखा है जो आजकल हाई-प्रोफाइल लोगों का स्टेटस सिम्बल बनता जा रहा है। अरे भाई! कुत्ता पालो, बिल्ली पालो या और कुछ पालो। मगर इन्हें भी स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ते हुए शौचालय तो चाहिए।

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