ईमानदारी से लक्ष्य तय हो तो सफलता निश्चित : भगवान सहाय

जागरूक जनता के मुख्य संपादक शिवदयाल मिश्रा की समाजसेवी भगवान सहाय धांसिल से खास चर्चा

आदमी का व्यवहार एक ऐसा हथियार है जिससे चाहो तो हजारों दुश्मन बना सकते हो और चाहो तो अनगिनत मित्र। ये एक ईश्वरीय देन है। ऐसी ही एक शख्सियत है भगवान सहाय धांसिल जिनके अनगिनत मित्र हैं। ये मित्र उनके मिलनसार स्वभाव और हंसमुख चेहरे की बदौलत ही हैं। बात करने का सलीका ऐसा कि एक बार इनसे जो मिल लिया तो फिर इनका ही होकर रह जाता है। इनसे कुछ समय पूर्व एक मुलाकात हुई और उस मुलाकात में मुझे महसूस हुआ कि वाकई ये एक शख्सियत हैं जिनके जीवन से लोगों को प्रेरणा मिल सकती है। बात को प्रारंभ करते हुए मैंने इनसे पूछा कि आप किसी पार्टी पोलिटिक्स से जुड़े हुए हैं क्या? इन्होंने मंद-मंद मुस्कराते हुए कहा कि नहीं जी मेरा पार्टी पालिटिक्स से क्या काम है। मैं तो ट्रेक्टर बेचता हूं और अपना काम करता हूं। मैंने इनके गोविन्दगढ़ स्थित आयसर के शोरूम पर एक आलमारी में ढेर सारे प्रतीक चिन्ह रखे हुए देखे जिन्हें करीने से सजा रखा था,जो कि धांसिलं को सम्मान के रूप में विभिन्न संस्थाओं से प्राप्त हुए थे। दूसरी तरफ इसी प्रकार शीशे की आलमारी में प्रशंसा पत्र सजा रखे थे। इन्हें देखकर जागरूक जनता ने इनसे कहा कि ये सब क्या है तो इन्होंने कहा कि ये मुझे समाज और संस्थाओं ने सम्मानित किया है उनकी यादें हैं। इसके बाद कॉफी की चुस्कियां चलती रहीं और हम बातचीत करने लगे। बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए भगवान सहाय धांसिल ने कहा कि मैं बचपन से ही शिक्षा और राजनीति से जुड़ा हुआ हूं। गोविन्दगढ मेरा जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों है। ये गोविन्दगढ़ पंचायत समिति (जयपुर)  में प्रधान रह चुके हैं। इन्होंने बताया कि मैंने 1979 में व्यापार प्रारंभ किया था जो भी कृषि से संबंधित क्योंकि मैं जन्म से किसान हूं। 1985 से राजनीति में हूं और कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ हूं। 2000 से 2005 तक गोविन्दगढ़ पंचायत समिति का प्रधान रह चुका हूं। ये विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं जिनमें मुख्य रूप से जयपुर जिला परिषद के सदस्य तथा कृषि उपज मंडी समिति चौमूं का डायरेक्टर पद शामिल है। इसी के साथ ये समाज सेवा में भी तत्पर रहते हैं। वर्तमान में चौमूं में यादव समाज के अध्यक्ष पद पर रहते हुए समाज में व्याप्त बुराईयों और बच्चे-बच्चियों को शिक्षित करने का कार्य संभाल रखा है। धांसिल से जब पूछा गया कि आपकी शिक्षा-दीक्षा कहां और कैसे हुई तो उन्होंने कहा कि 1966 में हायर सैकण्ड्री पास की है और यही मेरी सम्पूर्ण शिक्षा है। लायन्स क्लब की सदस्यता के तहत गरीबों के लिए नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर लगवाए, विधवाओं के लिए लायन्स क्लब से सिलाई मशीनें, विकलांगों को ट्राई साइकिलें, विकलांग सर्टीफिकेट, एवं परिवहन विभाग से लाइसेंस दिलवाए जो कि उस समय मुश्किलों से बन पाते थे। धांसिल ने कहा कि आज तो वरिष्ठ नागरिकों के लिए आसानी से रोडवेज के पास बन जाते हैं मगर पहले बहुत मुश्किलों से बन पाते थे उस दौरान 60 वर्ष से ऊपर वालों को  अपने प्रयासों से पास बनवाए और लोगों का स्नेह प्राप्त किया। 2008 में विधायक का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके धांसिल से जब पूछा कि आप बच्चे-बच्चियों को आगे बढ़ाने के लिए क्या कर रहे हैं तो इन्होंने कहा कि आज कंपिटीशन का जमाना है और कंपिटीशन के लिए हमने एक लाइब्रेरी और कोङ्क्षचग सेन्टर खोलने की योजना बनाई है जो जल्दी ही मूर्तरूप ले लेगी। धांसिल की शादी मात्र 15 वर्ष की उम्र में हो गई थी। इनके एक पुत्र हैं जो कालेजों का संचालन करते हैं। एक कॉलेज लड़कों का है जिसमें एक हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं और दूसरा कॉलेज लड़कियों का है जिसमें 4000 लड़कियां शिक्षा ग्रहण करती हैं। धांसिल ने बताया कि मेरे दिमाग में प्रारंभ से ही ग्रामीण बच्चे-बच्चियों की शिक्षा के बारे में खयाल आता रहता था कि कैसे इन्हें शिक्षित किया जाए और इसी विचार को कार्यान्वित करते हुए 2003 में बच्चियों का कॉलेज ब्राइट मून गल्र्स कॉलेज गोविन्दगढ़ में प्रारंभ किया जिसमें मात्र 32 छात्राएं थीं। समय के साथ शिक्षा के प्रति जागृति आई और आज कॉलेज में 4000 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। इसी प्रकार लड़कों के लिए श्रीकृष्ण महाविद्यालय गोविन्दगढ़ में प्रारंभ किया। भगवान सहाय धांसिल ने बताया कि मेरा लक्ष्य नई पीढ़ी को शिक्षा से जोडऩा है अगर युवा शिक्षा से जुड़ेगा तो निश्चित ही आगे बढ़ेगा। दूसरा समाज को जागरूक करना चाहता हूं ताकि मृत्युभोज, दहेज प्रथा एवं बाल विवाह जैसी बुराइयों से छुटकारा मिल सके। जागरूक जनता समाचार पत्र के माध्यम से मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि ईमानदारी से रहो और लक्ष्य लेकर चलो। सफलता जरूर मिलती है।ं

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