देश के युवाओ के प्रेरणा स्त्रोत बन रहे हैं जिला महेन्द्रगढ़ गांव सीगड़ा के बेटे लक्की राव

कई वर्षों से गांव-गांव जाकर ग्रामीणों एवं युवाओं को सामाजिक कार्यों और बेटियों को पढ़ाने का संदेश देकर जागरूक कर रहे हैं 

लिंगानुपात को बढ़ावा मिलना हैं बड़ी उपलब्धि

यूँ तो हजारों लाखों आते हैं और चले जाते हैं |

वो बिरले ही होते हैं जो सदियों में जन्म लेते हैं और युगों तक याद रखे जाते हैं ||

 

आज समाजसेवा का मतलब, नेतागिरी करना हो गया है। आम इंसान सोचता है कि वो तो समाजसेवा कर ही नहीं सकता। समाजसेवा करने के लिए समय और पैसा चाहिए और दोनों चीज उनके पास नहीं होती। क्योंकि आम जनता का पूरा समय पैसा कमाने में ही खर्च हो जाता है | ऐसे में ‘समाजसेवा’ शब्द एक फैशन की तरह इस्तेमाल होने लगा है। जो थोड़ी-बहुत समाजसेवा होती है वो भी सिर्फ सोशल मीड़िया पर छा जाने के लिए। पहले कहा जाता था “नेकी कर कूएं में ड़ाल” लेकिन अब कूएं ही नहीं रहें। अत: अब ऐसा लगता है कि हर छोटी-मोटी नेकी सोशल मीड़िया पर अपलोड करने के लिए ही की जाती है।लेकिन आज हम मिलेंगे एक ऐसे व्यक्ति से, जो न तो कोई नेता है, न हीं कोई बड़ा अधिकारी | फिर भी उसने देश के सामने समाजसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। इन युवा का नाम है ‘लक्की राव सीगड़ा ’, जो गांव सीगड़ा जिला महेन्द्रगढ़ हरियाणा के रहने वाले हैं  | ऐसे लोग बिरले होते हैं जो ऐसे सपने सोचते हैं और उनको पूरा भी करते हैं कि देश मे परोपाकार की भावना  हो ,सम्मान हो, समर्पण हो। इसी प्रकार की सोच साधारण परिवार मे जन्मे एक बेटे की  है,जो एक इंसानियत कि मिशाल बन कर  देश मे इंसानियत की  लहर लाना चाहता है।  हरियाणा के सबसे पुराने जिले महेन्द्रगढ़ के गांव सीगड़ा में जन्मा लक्की राव देश मे इंसानियत को नई पहचान दिलाना चाहता है। बुलंद हौसलो के साथ लक्की सीगड़ा  ने ‘ जागरूक जनता के साथ साँझा किए अपने विचार:- 

 

सबसे पहले अपने बारे में बताइए और आपकी शुरूआती शिक्षा कहाँ से  हुई ?

मैं मूलत: हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जिले में गांव सीगड़ा का रहने वाला हूँ मेरे पिताजी एक किसान हैं | 

मैं पांचवी कक्षा तक एमडी स्कूल सीगड़ा में पढ़ा | दसवीं कक्षा विद्या निकेतन स्कूल सीगड़ा से की और सीनियर सेकण्डरी कक्षा राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकण्डरी  स्कूल महेन्द्रगढ़ से पास की | फिर कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एचसील गुड़गांव से डिप्लोमा किया | जनसेवा में रूचि होने के कारण समाज सेवा के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से कदम बढ़ा दिया | समाज सेवा के साथ-साथ आज भी पढ़ाई जारी हैं |

 

आपको समाज सेवा की प्रेरणा कहाँ से मिली ?

 मेरे दादा जी स्वर्गीय अमीलाल यादव मेरे प्रेरणा स्त्रोत रहे | सामाजिक लोगों से जुड़ने एवं कार्य करने की प्रेरणा मुझे मेरे स्वर्गीय दादा जी अमीलाल यादव जी से भी मिली जो एक किसान थे | उनका मेरी जिन्दगी को सवाँरने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं | पढ़ाई के दौरान भी प्रकृति से मेरा बहुत लगाव था | प्राथमिक शिक्षा के दौरान हमें नैतिक शिक्षा की बाते भी बताई जाती थी उसी दौरान शिक्षकों का प्रकृति के प्रति प्रेम देखकर मेरी रूचि भी पर्यावरण एवं जनसेवा में हो गई |  गांव के कुछ युवा साथी भी एकत्रित होकर अक्सर बरसात के मौसम में भी पौधे लगाते थे।पढ़ाई के दौरान ही एक दूसरे की सहायता करते थे उसी सिलसिले में आगे बढ़ते-बढ़ते एक ग्रुप बनता गया उसके बाद हम लोगों ने मिलकर जरूरतमंदों की सहायता करना शुरू किया। वर्ष 2007 में गांव के कुछ हमसे बड़े युवा साथियों ने युवा नेतृत्व एवं खेल भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बाबा महावीर दास (बीएमडी) युवा क्लब के नाम से एक ग्रुप का रजिस्ट्रेशन करवाया।उस ग्रुप में मुझे भी शामिल किया गया। सच पूछो तो मुझे पता ही नहीं चला की समाज सेवा की शुरआत कब से ही हो गई। चलते-चलते युवा जुड़ते गए और कारवाँ बनता गया। वर्ष 2013 में सभी साथियों ने इस संस्था का निर्विरोध अध्यक्ष नियुक्त कर आगे की जिम्मेवारी मेरे कंधों पर सौप दी।

आपने किन उद्देश्यों से समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखा ?

प्रत्येक छोटे-बड़े शख्स को मान सम्मान देना, आपसी प्रेम, सद्भाव व भाईचारा का माहौल कायम करना, आपसी मनमुटाव बात-चीत स्तर पर निपटाना ,लोगों की सेवा करना मेरे जीवन के उद्देश्य हैं। इन्हीं मकसद से मैंने  समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखा हैं |

 क्लब द्वारा जनहित में किए जाने वाले कार्य एवं मुहिमें कौन -कौन सी हैं?

क्लब द्वारा समय-समय पर पर्यावरण संरक्षण ,जल संरक्षण,स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

सम्बन्धित,साक्षरता एवं प्रोढ़ शिक्षा,व्यवसायिक प्रशिक्षण सम्बन्धित,महिला सशक्तिकरण,खेल गतिविधियाँ,साहसिक कार्य,रोजगार उत्पादन सामाजिक बुराइयों(कन्या भ्रुण हत्या,दहेज़ प्रथा ,बाल विवाह ,नशा -एक समस्या आदि) का उन्मूलन,शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में समाज कल्याण,सफाई अभियान ,सांस्कृतिक कार्यक्रम,अन्तर्राष्ट्रीय दिवस सप्ताह समारोह,संसाधन निर्माण ,राष्ट्रीय एकता ,सामाजिक कार्यो में सक्रीय बुजर्गो,महिलाओं,युवाओं एवं छात्रों का मनोबल बढ़ाने हेतु प्रोत्साहन देना व सम्मानित करना ,रक्दान शिविर एवं जागरूकता शिविर जैसे विभिन्न प्रकार की गतिविधियों एवं सामाजिक कार्यों का आयोजन किया है | 

संस्था को आज तक सरकार द्वारा कोई सहयोग मिला हैं?

संस्था को आज तक सरकार द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए किसी भी प्रकार की राशि उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।संस्था के पदाधिकारी अपनी निजी कमाई में से ही कुछ पैसा निकालकर समाज सेवा के पुनीत कार्य में मिलकर लगाते हैं।

आपका समाज सेवा में क्या-क्या योगदान रहा हैं?

17 वर्ष की उम्र मे ही मैंने समाज के प्रति अपने आपको समर्पित कर दिया था। शुरुआत मे गांव स्तर पर समाज सेवा में रूचि लेते हुए कार्य किया | शुरुआत में युवाओं को साथ लेकर युवा नेतृत्व के मिशन को मजबूत बनाने में कार्य किया | पर्यावरण संरक्षण अभियान के अन्तर्गत एक परिवार -एक पौधा मिशन के तहत देश भर में एक लाख पौधे लगाकर वातावरण को हरा-भरा करने का संकल्प लिया | एक परिवार -एक  परिण्डा अभियान का आगाज किया 5000 परिण्डे लगवाकर पक्षियों को संरक्षित करने का कार्य किया ताकि प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा मिल सके |उसके बाद बेटी बचाओ अभियान के तहत बेटियों का सामूहिक जन्मदिन कार्यक्रम,जन्मदिन एक सन्देश के तहत अपनेपन का अहसास कार्यक्रम ,बेटियों के जन्म पर परिवार का सम्मान कर कुआँ -पूजन कार्यक्रम का आयोजन करवाना , गाँवो और कच्ची बस्तियों मे जाकर जन समुदाय को बेटियों  के प्रति जागरुक किया।झुग्गी झोपडी में रहने वाले बच्चों के लिए ''आओ सवाँरे बचपन'' मिशन के तहत निःशुल्क शिक्षा एवं पाठ्य सामग्री वितरित की जा रही हैं |एक बेटी -एक पौधा अभियान का शुभारम्भ किया ताकि बेटियों को भी पर्यावरण प्रेमी बनाया जा सके | समय-समय पर बेटियों के लिए आत्मरक्षा शिविर के तहत  सैकडों बेटियो को आत्मरक्षा के गुर सिखाये गये। विभिन्न सम्मान समारोह ,जागरुकता शिविर एवं निःशुल्क चिक्तिसा शिविरों का भी आयोजन किया गया |

समाज सेवा के इस सफर मे आपके मुख्य सहयोगी कौन -कौन हैं ?

मेरे परिवार ने मेरा सहयोग किया जिनमे मेरी माता मुकेश देवी  एवं छोटी बहन शर्मिला का विशेष सहयोग रहा हैं |साथ ही मार्गदर्शक मेरे जीवन के समस्त शिक्षक,अधिवक्ता रेखा यादव ,विमलचन्द्र,नरेश यादव,कुलदीप यादव,शिवदयाल मिश्रा, प्रदीप बालरोड़िया,अजय सिगड़िया ,,मनेन्द्र शर्मा ,कर्मपाल,डॉ.ध्रुपद मौर्य, नेमीचन्द,सुरेश डाबर इटली, शिखा शर्मा,हेमलता शर्मा,ज्ञानेन्द्र मिश्रा,निशान्त भारद्धाज ,प्रियंका वर्मा,विकास ज्याणी,विनोद यादव 

सहित अनेकों मीडिया के पत्रकार साथियों के सहयोग से मैं इस पथ पर निरंतर मंजिल की ओर अग्रसर हूँ। इसी के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर जो हर पड़ाव में मेरे साथ खड़े रहे बीएमडी क्लब संस्था के सचिव इन्द्रजीत शर्मा है।जिनके योगदान को मैं और संस्था कभी भूल नहीं सकते । हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्यक्रम में संस्था की जिम्मेदारी इन्होंने कंधे पर संभाली ।

आपकी प्रमुख मुहीम कौन कौन सी हैं?

कन्या जन्म कुआँ पूजन एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन कर नवजात बेटी के परिवार का सम्मान कर बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच पैदा करना | एक बेटी एक पौधा मिशन के तहत बेटियों के साथ-साथ पर्यावरण को जोड़ना |युवा नेतृत्व को विकसित कर समाज सेवा दिशा में युवाओं को बढ़ाना जैसी अनेकों मुहिमों के साथ कार्य किया जा रहा हैं | 

जीवन में आपका स्वपन क्या  हैं ?

मेरा स्वपन है  कि मैं इंसानियत के लिये एक मिशाल बनूँ । मेरी पहचान एक इंसान के रुप मे हो और इसी पहचान को लेकर एक कारवाँ तैयार हो, जो इंसानियत कि पुनर्स्थापना करे एवं गर्व से कहे “हम है इंसान”। व्यक्ति केवल इंसानो का ही नहीं बल्कि बेजुबान पशु पक्षियो का भी मित्र बने ऐसा माहौल मैं बनाना चाहता हूँ,मैं  चाहता हूँ कि जब अस्पताल मे मरीज को खून की जरूरत पड़ें तो उसके लिए दस लोग रक्त देने को तैयार बैठे हो। निःस्वार्थ भाव से जरूरतमंद व्यक्ति की हर संभव सहयता की जानी चाहिए |

आपको लगता इतने कठिन लक्ष्य को आप प्राप्त कर पाओगे?

मेरा मानना हैं कि अगर आप सपने ही देखते है तो आपको बड़े से बड़े ही देखने चाहिए क्योंकि उन बड़े सपनो की चाह में हम अनेकों छोटे लक्ष्य आसानी से भेद जाते हैं। सफलता की पूर्ण आशाओ के साथ ,अपनेे मित्रो के सहयोग एवं पूर्ण इमानदारी से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हूँ। मैं कर पाऊँगा या नही, यह मैं नही जानता, बस इतना जानता हूँ कि जाते जाते दुनिया को एक माहौल दे जाऊंगा, जो इंसानियत के इतिहास मे एक मिशाल होगा।

भविष्य में समाज को सही दिशा देने आपकी क्या योजना हैं

भविष्य में संस्था द्वारा युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए रोजगार  फेयर का आयोजन करवा क्षमता के अनुरूप रोजगार प्रदान करवाना ,स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना,महिलाओं को लघु उद्योग के प्रति जागरूक कर आत्मनिर्भर बनाना, सामाजिक बुराइयों दहेज़ प्रथा,बल विवाह ,नशा -एक समस्या को समाप्त करना आदि  इसी तरीके से समय-समय पर विभिन्न योजनाओं को चलाकर समाज को सही दिशा देने का प्रयास  करने की योजना हैं |

आप युवा हैं तो युवाओं को कोई सन्देश देना चाहोगे ?

मानव एक सामाजिक प्राणी है । ‘प्राणी’ इस जगत का सर्वाधिक विकसित जीव है ओर इस समाज के बिना उसका रहना कठिन ही नहीं असंभव है ।  समाज के बिना मानव का पूर्ण रूप से विकास होना सम्भव ही नहीं है । इसलिए मानव को हर कदम कदम पर समाज की आवश्य कता होती है समाज के लोगों के बीच ही हम अपने जीवन का अधिकतर समय व्यहतित करतें है ।  सच्चे हृदय से की गईं समाज सेवा ही इस देश व इस पूरे संसार व समाज का कल्याण कर सकती है । किसी भी पीड़ित व्यक्ति की निःस्वार्थ भावना से सहायता करना ही समाज-सेवा है । वास्तव में परोपकार ही समाज-सेवा है । हमारा देश सबसे ज्यादा युवा आबादी वाला देश हैं |युवाओ के लिए यही सन्देश हैं की अपने जीवन का जो समय बचता हैं वो समाज हित में लगाकर  देश को आगे बढ़ाने में सहयोग करे | 

यह युवा सोच है हरियाणा के एक युवा समाजसेवी लक्की राव सीगड़ा की , आज लक्की सीगड़ा अपनी इसी सोच के कारण अनेको युवाओ के प्रेरणास्त्रोत है,जिसके फलस्वरूप आधुनिक दुनिया मे ऐसी भव्य सोच रखने वाले लक्की सीगड़ा आज अपने मुकाम को पा चुके हैं, सैंकडो युवाओ एवं साथियों को लक्की राव देश व समाज की सेवा की राह पर ला चुके हैं । समाज के प्रति इसी समर्पण को देखते हुए अनेकों बार लक्की राव अनेकों सामाजिक मंचो ,सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों ,जनप्रतिनिधियो ,प्रशासनिक अधिकारियों  द्वारा सम्मान प्राप्त कर चुके हैं । कुछ दिनों पहले माननीय डॉ.बनवारीलाल जनस्वास्थ्य मंत्री हरियाणा सरकार द्वारा भी सम्मान किया गया था |

वीर सपूत सिर्फ वो ही नहीं होते, जो सीमा पर दुश्मनों से लड़ते है। आज भारत को ऐसे ही वीर सपूतों की आवश्यकता है जो निस्वार्थ भाव से अपना कार्य करें। एक छोटा बच्चा जो गरीबी के कारण पढ़ नहीं पाता,अच्छे वस्त्र नहीं पहन पाता उस बच्चे की मदद के लिए एक युवा का दिल पसीजता हैं और वो युवा उसकी सहायता के लिए आगे आता हैं |हमेशा जरुरतमंदों की सहायता करता है। क्या कहेंगे आप ऐसी निस्वार्थ सेवा को? मैं  भारत के इस वीर सपूत को उसके निःस्वार्थ सेवा के लिए सलाम करता हूँ | मैं ही क्यों, मुझे लगता है कि आप भी उन्हें अवश्य सलाम करेंगे |

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