दुर्गा को प्रसन्न करने के सबसे पवित्र और सिद्ध दिन नवरात्र के

देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए वर्ष के सबसे पवित्र और सिद्ध दिन नवरात्र के माने गए हैं। इन नौ दिनों में मां अपने भक्तों और साधकों पर पूर्ण कृपा बरसाने को आतुर रहती हैं। जो लोग जीवन में धन, मान, सुख, संपत्ति, वैभव और सांसारिक सुखों को पाना चाहते हैं, उन्हें नवरात्र में देवी के सिद्ध दिनों में साधना जरूर करना चाहिए। अधिकांश लोग वर्ष की दो नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं। ये नवरात्रि चैत्र और शारदीय नवरात्र कहलाते हैं, लेकिन इन दो के अलावा दो और नवरात्र होते हैं, जिन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। वर्ष 2018 की प्रथम गुप्त नवरात्रि माघ शुक्ल प्रतिपदा यानी 18 जनवरी से प्रारंभ हो रही है, जो माघ शुक्ल नवमी 26 जनवरी को पूर्ण होगी। गुप्त नवरात्रि आमतौर पर उत्तरी भारत जैसे हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और इनके आसपास के प्रदेशों में बड़े पैमाने पर मानी जाती है। गुप्त नवरात्रि में भी नौ दिनों तक क्रमानुसार देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। 

गुप्त नवरात्रों में देवी होती है शीघ्र प्रसन्न

माघ और आषाढ़ माह में ये गुप्त नवरात्र आते हैं। गुप्त नवरात्रि का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रों से भी अधिक हैं, क्योंकि इनमें देवी अपने पूर्ण स्वरूप में विद्यमान रहती हैं, जो प्रकट रूप में नहीं होता है। गुप्त नवरात्र में देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं, लेकिन इसमें सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण बात यह है कि साधकों को पूर्ण संयम और शुद्धता से देवी की आराधना करना चाहिए। तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए खास दिन जो साधक तंत्र-मंत्र की सिद्धियां प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए गुप्त नवरात्रि के दिन बेहद खास होते हैं। इनमें वे साधक गुप्त स्थान पर रहते हुए देवी के विभिन्न स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की साधना में लीन रहते हैं। 

भोग-विलास के साधन गृहस्थ साधक जो सांसारिक वस्तुएं, भोग-विलास के साधन, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन पाना चाहते हैं उन्हें इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। यदि इतना समय न हों तो सप्तश्लोकी दुर्गा का प्रतिदिन पाठ करें। देवी को प्रसन्न करने के लिए और साधना की पूर्णता के लिए नौ दिनों में लोभ, क्रोध, मोह, काम-वासना से दूर रहते हुए केवल देवी का ध्यान करना चाहिए। कन्याओं को भोजन कराएं, उन्हें यथाशक्ति दान-दक्षिणा, वस्त्र भेंट करें। 

नौ दिन नौ देवी पूजन  

18 जनवरी - घट स्थापना एवं मां शैलपुत्री पूजन 

19 जनवरी- मां ब्रह्मचारिणी पूजन 

20 जनवरी- मां चंद्रघंटा पूजा 

21 जनवरी- मां कुष्मांडा पूजा 

22 जनवरी- मां स्कंदमाता पूजा, बसंत पंचमी 

23 जनवरी- मां कात्यायनी पूजा 

24 जनवरी- मां कालरात्रि पूजा 

25 जनवरी- मां महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी 

26 जनवरी- मां सिद्धिदात्री पूजा, नवरात्रि पारण

मां दुर्गा की तिथि अनुसार नवधा भक्ति के 09 स्वरूप 09 दिन और 09 भोग से मिलेगा आशीर्वाद

नवरात्रि के दौरान माता की आराधना के साथ ही व्रत-उपवास और पूजन का विशेष महत्व है। जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन, मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार इन नौ दिनों में माता को हर दिन के मुताबिक भोग या प्रसाद अर्पित करने से सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है।  नवरात्रि में देवी को हर दिन एक विशेष प्रकार का भोग लगाया जाता है। नवरात्रि में पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक देवी को ये विशेष भोग अर्पित करने और बाद में इसे गरीबों में दान करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। आइए जानते हैं कि गुप्त नवरात्र के मौके पर किस दिन मां को कौन सा भोग लगाने की परंपरा है जिससे व्यक्ति के जीवन में दुख का नाश होकर सुख-शांति और खुशहाली का प्रवेश होता है।

प्रतिपदा  : रोगमुक्ति के लिए घी का भोग | 

द्वितीया: दीर्घायु के लिए शक्कर का भोग |

तृतीया : कष्ट निवारण के लिए दूध का भोग | 

चतुर्थी  : पारिवारिक सुख के लिए मालपुए का भोग । 

पंचमी : सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए केले का भोग |

षष्ठी  :  धन प्राप्ति के लिए शहद का भोग | 

सप्तमी : गरीबी दूर करने के लिए  गुड़ का भोग । 

अष्टमी : सुख-समृद्धि, एश्वर्य की प्राप्ति  के लिए नारियल का भोग  । 

नवमी : अनाजों का भोग लगाएं, संतान की प्राप्ति ।

माँ को इस रंग के वस्त्र पहनाने से मिलेगा धन धान्य और एश्वर्य

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। लोग कलश स्थापना करके पूरे नवरात्र व्रत रखकर मां दुर्गा की उपासना करते हैं। इन नौ दिनों तक अलग-अलग देवियों का श्रृंगार विभिन्न रंगों के परिधानों में  करने पर माँ की पूर्ण कृपा प्राप्त की जा सकती है|नौं दिनों तक मां के स्वरूप के अनुसार माता  के वस्त्रो का रंग विशेष लाभ देने वाला है| 

नवरात्र प्रतिपदा: पीले रंग की पोशाक

नवरात्र द्वितीया : हरे रंग की पोशाक 

नवरात्र तृतीया : हल्के पीले रंग की पोशाक 

नवरात्र चतुर्थी : नारंगी रंग की पोशाक 

नवरात्र पंचमी : (श्वेत)सफेद रंग की पोशाक 

नवरात्र षष्ठी : लाल रंग की पोशाक 

नवरात्र सप्तमी : नीले रंग की पोशाक

नवरात्र अष्टमी : इस दिन लाल/गुलाबी रंग की पोशाक

नवरात्र नवमी : जामुनी रंग की पोशाक

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:........................

सिर्फ कन्या पूजन के दिन ही नही  जीवन भर करें नारियों का सम्‍मान

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।-अथर्ववेद

जिस कुल में नारियों कि पूजा, अर्थात सत्कार होता हैं, वह कुल देवतुल्य हो आता हैं और जिस कुल में स्त्रियों कि पूजा नहीं होती, वहां जानो उनकी सब क्रिया निष्फल हैं। नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं  बहूत जगह कन्याओं का शोषण होता है और उनका अपनाम किया जाता है आज भी भारत में बहूत सारे गांवों में कन्या के जन्म पर दुःख मनाया जाता है ऐसा क्यों ?  क्या आप ऐसा करके देवी मां के इन रूपों का अपमान नहीं कर रहे हैं. कन्याओं और महिलाओं के प्रति हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी. देवी तुल्य कन्‍याओं का सम्मान करें. इनका आदर करना ईश्‍वर की पूजा करने जितना पुण्‍य देता है. शास्‍त्रों में भी लिखा है कि जिस घर में औरत का सम्‍मान किया जाता है वहां भगवान खुद वास करते हैं.

नवरात्र में सप्‍तमी तिथि से कन्‍या पूजन शुरू हो जाता है और इस दौरान कन्‍याओं को घर बुलाकर उनकी आवभगत की जाती है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन इन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर इनका स्वागत किया जाता है. माना जाता है कि कन्याओं का देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख समृधि का वरदान देती हैं.

जिस प्रकार मां की पूजा भैरव के बिना पूर्ण नहीं होती , उसी तरह कन्या-पूजन के समय एक बालक को भी भोजन कराना बहुत जरूरी होता है. यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है

आयु अनुसार कन्या पूजन से मिलेगी सुख-समृद्धि

- नवरात्र में सभी तिथियों को एक-एक और अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं की पूजा होती है.

- दो वर्ष की कन्या (कुमारी) के पूजन से दुख और दरिद्रता मां दूर करती हैं. तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति रूप में मानी जाती है. त्रिमूर्ति कन्या के पूजन से धन-धान्‍य आता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है.

- चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है. इसकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है. जबकि पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है. रोहिणी को पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है.

- छह वर्ष की कन्या को कालिका रूप कहा गया है. कालिका रूप से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है. सात वर्ष की कन्या का रूप चंडिका का है. चंडिका रूप का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.

- आठ वर्ष की कन्या शाम्‍भवी कहलाती है. इसका पूजन करने से वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है. नौ वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है. इसका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है तथा असाध्य कार्यपूर्ण होते हैं.

- दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है. सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूर्ण करती है.

नवरात्रि का राशियों पर प्रभाव

नवरात्रि पर्व सभी के लिए बहुत-सी खुशियां लेकर आया है। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में सुख-समृद्धि, यश-वैभव, आर्थिक-मानसिक एवं शारीरिक सुख की चाहत रहती है। इस वर्ष नवरात्री पर राशिगत यह प्रभाव देखने को मिलेंगे |

मेष- धन एवं सुख प्राप्ति। 

 वृषभ- शत्रु पीड़ा अर्थ लाभ।

 मिथुन- मानसिक चिंता, सुख प्राप्ति। 

कर्क- संतान की चिंता, स्वास्थ्य में कष्ट।

 सिंह- शत्रु पीड़ा, धन लाभ।

 कन्या- अर्थ हानि, तनाव 

 तुला - व्यर्थ चिंता, कष्ट, पद लाभ रोग। वृश्चिक - आर्थिक लाभ प्राप्त।

 धनु - व्यर्थ चिंता, कष्ट, पद लाभ रोग।

 मकर - सुख, सम्मान धन हानि।

कुंभ -खर्च, रोग, चिंता रहेगी।

 मीन - हानि मानसिक हानि | 

राशि के अनुसार करें माता की पूजा और उपाए

नवरात्रि में कोई नौ दिनों तक उपवास रखता है तो कोई चप्पल नहीं पहनता। यदि आप इस नवरात्रि में माता को प्रसन्न करना चाहते हैं तो अपना राशि के अनुसार माता की पूजा करें। इससे आपको माता कि विशेष कृपा तो प्राप्त होगी साथ ही आपकी हर मुश्किल भी आसान होगी...

मेष राशि- स्कंदमाता की उपासना ,दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। 

वृषभ राशि-महागौरी की उपासना ललिता सह्स्त्र नाम का पाठ करें। 

मिथुन राशि-बर्हम चारिणी की उपासना ,तारा कवच का पाठ रोज़ करें। 

कर्क राशि- शैलपुत्री की पूजा उपासना लक्ष्मी सह्स्र्त्रनाम का पाठ करें। 

सिंह राशि -मां कूष्मांडा की साधना दुर्गा मंत्रो का जप करें। 

कन्या राशि -मां बर्ह्मचारिणी का पूजन लक्ष्मी मंत्रो का सविधि जप करें। 

तुला राशि - महागौरी की पूजा आराधना काली चालीसा या संप्तशती के प्रथम चरित्र का पाठ करें। 

वृश्चिक राशि - स्कंदमाता की उपासना दुर्गा सप्तशती का पाठ करें 

धनु राशि - मां चंद्रघटा की उपासना करें संबंधित मंत्रो को यथाविधि अनुष्ठान करें। 

मकर- कालरात्रि की पूजा नवार्ण मंत्र का जप करें। 

कुंभ राशि - कालरात्रि की उपासना देवी कवच का पाठ करें।

मीन राशि -मां चंद्रघंटा की उपासना हरिद्र (हल्दी) की माला से यथासंभव बगलामुखी मंत्र का जप करें। 

09 रूप नवदुर्गा वंदन 09 ग्रहों के शुभ और अशुभ प्रभाव को नियंत्रित करने का अचूक उपाए 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रतेक प्राणी किसी न किसी ग्रह बाधाओ से पीड़ित रहता है यदि ये सोम्य गृह है तो तकलीफ का स्तर कुछ कम होता है और कूर ग्रहों द्वारा पीड़ित रहने पर अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है ग्रहों की शांति हेतु यन्त्र ,तंत्र या मंत्र तीनो में से किसी एक को आधार बनाकर माँ दुर्गा के शक्ति पर्व नवरात्री में आराधना की जाय तो ग्रह जनित बाधाओ से मुक्ति प्राप्त होती है| नवरात्रि में नो दिनों तक देवी दुर्गा के नो रूपों की आराधना कर न सिर्फ शक्ति संचय किया जाता है वरन नव ग्रहों से जनित दोषों का समन भी किया जाता है|

देवी और उनसे सम्बन्धित ग्रह आराधना 

शैलपुत्री - सूर्य, 

चंद्रघंटा - केतु,

 कुष्माण्डा - चंद्रमा, 

स्कन्दमाता - मंगल, 

कात्यायनी - बुध,

 महागौरी - गुरु, 

सिद्धिदात्री - शुक्र, 

कालरात्रि - शनि, 

ब्रह्मचारिणी - राहु

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