ज़िंदगी को खुल के जीना

ज़िंदगी को खुल के जीना का मतलब है कि पूरी कायनात के अनगिनत करतबो को अपने सामने देखना, प्रकृति के अनूठे रहस्यों का साच्छी बनना,  ख़्वाबों को हकीकत में तब्दील होते देखना। वाकई सराबोर कर देते है ये सारे  अनुभव। हाँ, अनुभव ऐसे जो दे जाते है हमें खुशी से जीने का संदेश। किस तरह से वक़्त ने अपने हाथो में हमारी ज़िन्दगी की बागडोर संभाले हुए है और वक़्त बताता है कि इसके बिना ज़िन्दगी असल मे कितनी अधूरी है। माना कि ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए हमें कई उतार चढ़ाव को पार करना होता है। ज़िम्मेदारी तो हर कोई उठाता है . पैसा भी हर कोई कमा लेता है लेकिन ज़िन्दगी को हर कोई नही ज़ी पाता, क्योकि उसे जीने के लिए उससे भागने की नही बल्कि उसे जानने की ज़रूरत होती है। खुशी और गम ज़िन्दगी के दो अहम पहलू है क्योकि ये सिर्फ सीख ही नही देते अपितु समय की धारा में भिगो कर रख देते है। ज़िन्दगी म अगर हम। खुश है तो हमे आभाष होता है कि ज़िन्दगी एक वरदान है किंतु ठीक उसके विपरीत जब हम दुखी होते है तो आभास होता है हम कितना अधूरे है शायद तब जिंदगी हमे एक श्राप की भांति लगती है।  हम स्वयं को कितना  अधूरा महसूस करते है और गिरते आँसुओ को रोक नही पाते और हम बहते चले जाते हैं..... बहते चले जाते हैं। दिन तो लौटती पौटती छाया है तो हमेशा हँसते रहे और ज़िन्दगी को जीते रहें। क्योंकि कोई नही जानता कल हो न हो। और हंसकर जीना ही ज़िन्दगी है।
- विकास सक्सेना

Leave a Comment