पूर्णिमा तिथि को प्रदोष कालयुक्त भद्रा रहित सुभद्रा योग में मनाया जाएगा होली का त्यौहार

होली का त्योहार आमतौर पर दो दिनों का होता है। पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है जिसे धुलण्डी भी कहा जाता है। पं. अक्षय शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के नियमानुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में करना चाहिए। इस साल 1 मार्च को सुबह 09बजकर 02मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है लेकिन इसके साथ भद्रा भी लगा होगा।

 

ऐसा नियम है कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए इससे अशुभ फल प्राप्त होता है। शाम में 7 बजकर 40 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा। वैसे शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ स्थिति बनी हुई है। धर्मसिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार होलिका दहन के लिए तीन चीजों का एक साथ होना बहुत ही शुभ होता है। पूर्णिमा तिथि होप्रदोष काल हो और भद्रा ना लगा हो। इस साल होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं। त्रिग्रही योग और कन्या लग्न से जनता को राहत मिलेगी ।

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