स्वच्छता अभियान चल रहा है या पोस्टर अभियान!

देश के प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान चलाकर सफाई और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागृत तो कर ही दिया है। पहले कहीं भी लोग गंदगी फैला दिया करते थे। कचरे को कहीं भी डाल देते थे, मगर अब घर हो या बाहर कोई भी कचरा होता है उसे फेंकने के लिए एक बार तो नजरें डस्टबिन को ढूंढ़ेगी ही। वो अलग बात है कि अगर डस्टबिन नहीं दिखे तो चुपके से कचरे को इधर-उधर डाल दिया जाता है। सार्वजनिक जगह हो या सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं, स्कूल, अस्पताल, सड़क कहीं भी इस वक्त एकाएक कचरा नजर नहीं आता। सार्वजनिक स्थलों एवं बाजार आदि में जन सुविधाओं का अभाव जरूर देखने को मिलता है, मगर अब धीरे-धीरे ये समस्या भी खत्म होती जाएगी। एक तरफ सफाई अभियान चारों तरफ देखने को मिल रहा है। तो दूसरी तरफ पोस्टर अभियान भी परबान चढ़ा हुआ है। जिधर देखो उधर ही शहर में सफाई अभियान में जन प्रतिनिधि के फोटो पोस्टरों से शहर अटा पड़ा है। पहले कुछ शहर के पार्षद आए दिन सफाई के फोटो फैसबुक पर अपलोड करते आ रहे थे। अब तो मुखिया ही पोस्टरों पर शहर भर में छा रहे हैं। स्वच्छता अभियान की आड़ में क्या यह व्यक्ति विशेष को प्रचारित करने का माध्यम नहीं है। जितने पैसे पोस्टरों पर खर्च किए जा रहे हैं। क्या वह पैसा जनता के हित में या और किसी माध्यम से स्वच्छता अभियान में नहीं लगाया जा सकता था। मगर मौका मिल रहा है प्रचार पाने का, तो क्यों चूकें। नगर निगम का स्वच्छता अभियान और पोस्टर अभियान एक-दूसरे के सहयोगी जो बने हुए हैं। मगर अब लग रहा है शायद पोस्टर अभियान ने बाजी मार ली है। क्योंकि कई जगह इन दिनों कचरा उठाने वाली गाडिय़ां भी पहुंचने में आनाकानी जो करने लग गई हैं।

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