सरकार भी उपवास पर! कहां से कहां आ गए....

आंदोलन होते हैं, प्रति आंदोलन होते हैं। सत्याग्रह होते हैं, उपवास और व्रत भी होते आए हैं। अपनी समस्याओं का निदान करने के लिए ये सब होते आए हैं। संसद में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने पहले राष्ट्रीय स्तर पर उपवास किया, वह भी एससी, एसटी की आड लेकर किया। तो सत्ता पक्ष क्यों पीछे रहने लगा। दो दिन बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी राष्ट्रीय स्तर पर उपवास रख लिया। बहाना बनाया संसद में कामकाज नहीं करने देने का। ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब सत्ता पक्ष काम नहीं करने देने की शिकायत लेकर सड़कों पर उपवास कर रहा हो। जरा सोचने की बात है। जब-जब सांसद और विधायकों के वेतन भत्ता बढ़ाने की बात हुई, कभी भी किसी भी नेता ने जरा सा भी विरोध नहीं किया और एक झटके में प्रस्ताव पास हो गया, जैसे किसी को कुछ हुआ ही नहीं। और जब जनता के लिए कोई मुद्दा होता है, उस पर कई-कई दिनों तक संसद नहीं चलने दी जाती। कभी विपक्ष की हठधर्मिता तो कभी पक्ष की जिद। यूं ही संसद का समय जाया होता रहता है। मगर उस समय भी कोई यह सोचने की कोशिश नहीं करता कि जनता ने हमें यहां किस लिए भेजा है। सोचने की बात है कि कोई पीडि़त अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचे और थानेदार कह दे कि मैं तो उपवास पर बैठा हूं, सामने वाला मेरी बात ही नहीं मानता। तो क्या वह सही मायने में थानेदार हुआ? विडम्बना देखिए सरकार ही सड़कों पर बैठी है यह बताने के लिए कि विपक्ष हमें काम ही नहीं करने देता। काम करना सरकार का काम है। अगर विपक्ष तुम्हें काम करने ही नहीं देता तो फिर क्यों बैठे हो संसद में। जनता तो बेचारी चुनाव में अपना मत देकर बड़ी उम्मीदों के साथ प्रतिनिधि चुनकर सदन में भेज देती है कि हमारे सुख-दुख की परवाह ये प्रतिनिधि करेगा। मगर देखिए कहां से कहां आ गए हम। सरकार ही सड़कों पर बैठ गई। क्या उम्मीद की जा सकती है। खैर, जैसी हरि इच्छा।shivdayalmishra@gmail.com

Leave a Comment