तोडऩा मना है तो छोडऩा भी मना है!

जब घर से बाहर निकलते हैं तो जगह-जगह हमें कई चीजों  एवं कार्यकलापों की लिखित में मनाही दिख जाएगी। उदाहरण के लिए कई दीवारों पर लिखा होता है यहां पेशाब करना मना है। यहां थूकना मना है। यहां खड़े रहना मना है। यहां अनावश्यक बैठना मना है। यहां धूम्रपान करना मना है। यहां बैठकर शराब पीना मना है। यहां शोर मचाना मना है। यहां अकेले आना मना है। यहां झुंड में चलना मना है। यहां हॉर्न बजाना मना है। देर तक जागना मना है। देर तक सोना मना है। स्कूलों में लिखा होता है-असूल तोडऩा मना है। बागों में लिखा होता है फूल तोडऩा मना है। खेलों में लिखा होता है नियम तोडऩा मना है। तो जिंदगी को सुव्यवस्थित चलाने के लिए बहुतेरी मनाही है। ये सब समाज और जीवन को शांति से जीने के लिए है ताकि दूसरों को हमारे द्वारा कोई परेशानी उत्पन्न न हो। और इन बातों पर ध्यान देते हुए कुछेक अपवादों को छोड़कर नियमों की पालना भी की जाती है। लेकिन हमारे जीवन में नित्य प्रति कई तरह से नहीं चाहते हुए भी कलह होता है जिससे जीवन दु:खदायी हो जाता है। ऐसा लगने लगता है कि क्या यही जीवन है।  जिनकी आयु लंबी होती है उन्हें तो और भी अनचाहे माहौल का सामना करना पड़ता है। जीवन में सभी सुखी और शांति उत्तरोत्तर प्रगति करते हुए जीना चाहते हैं तो काश! लिखने वालों ने 'रिश्ते-नाते, परिवार, पति-पत्नी, दोस्ती, कुटुम्ब- कबीलेÓ आदि में ये क्यों नहीं लिखा कि 'साथ छोडऩा मना है।Ó इसलिए जब 'तोडऩा मना है तो छोडऩा भी मनाÓ होना चाहिए।

shivdayalmishra@gmail.com

Leave a Comment