गायब होने लगी हैं कचरा उठाने वाली गाडिय़ां!

देश के प्रधानमंत्री पद पर जब से नरेन्द्र मोदी आसीन हुए हैं तब से लगातार सफाई की ओर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है। सफाई पहले भी हुआ करती थी, मगर पहले और वर्तमान में बहुत अंतर आ गया है। लोगों की सोच में बदलाव आने लगा है। पहले कोई कहीं भी कचरा फेंक दिया करता था, मगर अब ऐसा नहीं है। एक बारगी तो कचरा फेंकने के लिए आम नागरिक की नजरें डस्टबिन को ढूंढेगी, अगर डस्टबिन दिखाई दिया तो वह कचरा डस्टबिन में ही जाएगा, वरना फिर इधर-उधर फेंक दिया जाता है, अपवाद स्वरूप तो कुछ भी संभव है। शहरों में न्यास, पालिका और निगम सभी ने अपने-अपन संसाधनों के अनुरूप कचरा उठाने की व्यवस्था कर रखी है। प्रात:काल घरों से कचरा निकाल कर फेंकने वाली गृहणियां भी कचरे को इकट्ठा करके रख लेती हैं और निगम की गाडिय़ों का इंतजार करती रहती हैं। मगर जब दिन ढलने तक निगम की गाड़ी नहीं आती है तो फिर सफाई व्यवस्था के लिए भला-बुरा भी कहने से नहीं चूकती। क्योंकि कचरा तो रोजाना ही फेंका जाना चाहिए। मगर हमारे देश में भ्रष्टाचार की जो जड़ें बड़ी गहरी बैठी हुई हैं उनका असर कैसे जाएगा। यह सवाल बार-बार दिमाग में कोंधता है। क्योंकि और शहरों की छोड़ें, जयपुर की ही बात करें तो स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू में तो गाडिय़ां दो-दो चक्कर भी लगाती थी, मगर अब जैसे-जैसे समय गुजरता जा रहा है। वैसे-वैसे गाडिय़ों के चक्कर कम हो गए हैं। अब तो स्थिति ये है कि कई-कई दिनों तक गाड़ी के दर्शन भी नहीं होते। मान लो एक गाड़ी में एक दिन का 500 रुपए का पैट्रोल-डीजल भी जलता होगा तो अगर पूरे जयपुर में दो-चार दिन की नागा करने पर हजारों रुपए की बचत सफाई ठेकेदार को हो जाती है, और लोग गली-मोहल्लों में बात करके रह जाते हैं। क्योंकि इस ओर ध्यान कौन दे। चुपचाप ठेकेदार ने शायद ऐसा ही फार्मूला अपना लिया हो, वरना क्या कारण है कि कचरा नियमित नहीं उठाया जा रहा है। घर के बाहर कचरा पड़ा रहता है और हवा में वह इधर-उधर उड़कर पड़ोसियों में लड़ाई का कारण भी बन रहा है। आखिर कचरा वाहन के नहीं आने पर कचरा कहां जाएगा। वापस गंदगी फैलती नजर आएगी। लिहाजा निगम को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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