सामाजिक सरोकार का दूसरा नाम साहिल

चेतेन्द्र मिश्रा @  जागरूक  जनता संवाददाता

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जयपुर। उठो, चलो, बढ़ो और लक्ष्य को प्राप्त करो। लक्ष्य पूरा हो जाये तो दूसरा लक्ष्य तय करो। यह लाईने सफल जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा पुण्य है। रक्तदान भी ऐसा ही कार्य है। गुलाबीनगरी में लोग रक्तदान से घबराते नहीं, बल्कि इसे पुनीत कार्य मानते है। यही वजह है कि जयपुर शहर में ऐसी महिला शख्सियत भी हैं, जिन्होंने अपनी 32 वर्ष की आयु में 10 से अधिक बार रक्तदान किया है। आईये जागरूक जनता के जरिए मिलते है क्लिनिकल साइक्लॉजिस्ट साहिल त्रिवेदी से। जयपुर की रहने वाली साहिल त्रिवेदी का कहना है कि हम किसी की मदद कर सकते हैं तो हमें करनी चाहिए। मदद अगर खून की हो तो इससे बड़ा उपहार क्या होगा। मरीज के लिए आर्थिक मदद इतनी तसल्ली नहीं देती जितनी जरूरत पडऩे पर ब्लड़ से मिलती है। त्रिवेदी का कहना है कि ब्लड़ में तो किसी की कोई सहभागिता नहीं होती। रक्तदान तो हमारे शरीर में से किया गया दान है। सामाजिक सेवा के चलते मैंने न्यायपालिका की राजकीय सेवा से भी त्याग पत्र दे दिया था।

न्यायपालिका की राजकीय सेवा से त्याग पत्र देकर समाज को नई दिशा देने की ओर अग्रसर है साहिल अजय त्रिवेदी। जागरूक जनता से अपने जीवन के अनछुए पहलुओं पर चर्चा के मुख्य अंश...

रक्तदान की प्रेरणा कहा से मिली?

मेरे पिताजी की रोड एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई थी। उस हादसे के बाद में काफी टूट चुकी थी। कुछ दिनों बाद मन में आया कि ऐसा क्या किया जाए जिससे लोगों की मदद की जा सके और रक्तदान करने और कराने का ख्याल आया। मैं अभी तक 10 बार रक्तदान कर चुकी हूं। मैंने 18 वर्ष की उम्र में पहला रक्तदान किया था। तब मम्मी-पानी ने मुझे खूब डांटा था। क्योंकि मैंने उन्हें बिना बताए रक्तदान किया था। जब उन्हें मेरे रक्तदान करने के बारे में पता चला तो उन्होंने मुझे खूब डांटा। पिताजी के एक्सीडेंट के समय परिवार का कोई भी सदस्य उनके पास नहीं था। एक्सीडेंट के समय मौजूद लोगों ने बताया कि उन्होंने अंतिम क्षणों में यही कहा कि मेरी दोनों आँखों से दो अलग-अलग इंसान दुनिया देखने चाहिए। परिवार ने पिताजी की अंतिम इच्छा के अनुसार दोनों आँखे दान कर दी। मेरे द्वारा पहला रक्तदान शिविर रावत एजुकेशनल ग्रुप में आयोजित किया गया था। मैंने एक बार चार माह में दो बार रक्तदान किया है। 

एनजीओ क्यों नहीं बनाते?

मुझे एनजीओ के नाम से ही एलर्जी है। मेरा मानना है कि एनजीओ बनाकर ही सेवा नहीं की जा सकती है। सेवा तो नि:स्वार्थ भाव से की जाती है। मैं किसी भी व्यक्ति के लिए कहीं भी किसी भी समय कोई सहायता उपलब्ध करा सकूं तो यह मेरे लिए खुशी की बात है। मैं आपको एक उदाहरण बताना चाहूंगी। कुछ दिनों पहले सवाईमानसिंह अस्पताल में एक व्यक्ति को 25 यूनिट रक्त की आवश्यकता थी। मुझे सूचना मिलते ही मैंने सम्पर्क करना शुरू किया। पर 25 यूनिट एक साथ कौन दे। अपने सम्पर्क के द्वारा ही तत्काल 10 व्यक्तियों से रक्तदान करवाकर रक्त उपलब्ध करवाया। 

तनाव क्या है?

तनाव एक ऐसी समस्या है, जिसका जीवन में हम सभी को कभी ना कभी समाना करना ही पड़ता है। ये हमारी जीवनशैली में इस कदर घुल चुका है की इससे बचने के लिए हमें प्रभावी कोशिश करनी होगी। तनाव एक प्रकार का द्वन्द है जो हमारे मन और विचारों के बीच एक गहरी दरार पैदा करता है। अवसाद यह संकेत देता है कि आप कई सारे मनोविकारों की जद में आ सकते है। तनाव के दौरान व्यक्ति मन से अशांत व अस्वस्थता का अनुभव करता है। ऐसे समय में हमारी कार्यक्षमता तो प्रभावित होती ही है, साथ ही मानसिक विकास में भी व्यवधान आता है। 

जीवन में क्या कुछ नया करना चाहते है ?

मैं वीमन अवेयरनेस को लेकर समय-समय पर वेलफेयर शिविर आयोजित करती रहती हूँ। मेरा जीवन में एक ही उद्देश्य है कि वे महिलाएं जो परिवार, समाज, रिश्तो से दुत्कार के, तलाकशुदा या किसी भी अन्य वजह से दुनिया में अकेली रह गई है। उनके लिए एक ऐसा घर बनाना चाहती हूँ। जहां वे अपना भविष्य संवार सके। 

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