मादा पैंथर की मौत के बाद उसके 3 बच्चों को मां की तरह पाल रहा डॉक्टर

जोधपुर@ जागरूक जनता।. माचिया बायोलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर के डॉक्टर श्रवणसिंह राठौड़ पैंथर के तीन शावकों को पिछले 10 दिनों से मां की तरह पाल रहे हैं। वे उन्हें सीने से लगाकर दूध पिलाते हैं। धूप में खिलाते हैं। डॉक्टर राठौड़ ने पिछले आठ साल में 26 पैंथर रेस्क्यू किए हैं। इसमें से 22 को स्वस्थ कर जंगल में छोड़ दिया।

दरअसल, सेणा गांव की पहाड़ी पर मादा पैंथर ने तीन शावकों को जन्म दिया था। 10 दिन पहले मादा पैंथर पर अन्य पैंथर ने हमला कर दिया, जिसमें उसके मुंह और पैरों पर चोटें आईं थी। उदयपुर के सीसीएफ ने उसकी तलाश में सेणा और कोठार गांव में सर्च ऑपरेशन भी चलाया था।

पत्नी की सलाह पर बची शावकों की जान

जब शावकों का रेस्क्यू किया गया तब ये चार दिन से भूखे थे। इन्हें अमेरिका से मंगवाया गया दूध पाउडर पिलाने की कोशिश की गई, लेकिन शावकों ने नहीं पिया। राठौड़ बताते हैं, "इनकी जान बचाना महत्वपूर्ण था। तभी पत्नी ने कहा कि इन्हें सीने से लगाओ। हो सकता है कि धड़कन सुनने के बाद दूध पी लें। यह आइडिया काम आ गया।" ऐसे में डॉ. राठौड़ ने उन्हें मां की तरह सीने से लगाकर दूध पिलाने का प्रयास किया। उनके इस प्रयास के बाद शावकों ने दूध पी लिया।

शावकों के साथ सेंटर में ही रह रहे हैं राठौड़

डॉ. राठौड़ इन शावकों को हर चार घंटे में दूध पिलाते हैं। सीने से लगाकर उनके साथ सोते हैं। रोज करीब एक घंटा उनके साथ खेलते हैं। नियमित मेडिकल जांच कर रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए दवा दे रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए सेंटर में ही रह रहे हैं। 

डॉ. राठौड़ ने बताया कि मादा पैंथर ने छह शावकों को जन्म दिया, लेकिन किसी को दूध नहीं पिलाया। कमजोरी से 3 शावकों की मौत हो गई। शावकों के दूध नहीं पीने से मन नहीं लगता था। आज आरटी के तीन बच्चे- सवा दो साल का कैलाश, एक साल 8 माह का रियाज और सवा साल की लिछमी हैं।

24 पैंथरों की बचा चुके हैं जान

डॉ. राठौड़ अब तक 24 पैंथरों को रेस्क्यू कर बचा चुके हैं। एक बार तो एक शावक को इन्फेक्शन से बचाने के लिए इंसानों के बच्चों के आईसीय में भर्ती करवाया था, उसके लिए भी अमेरिका से दूध मंगवाया था।

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