डांट का बदला : छात्रा से 6 घंटे तक पूछताछ; 2 घंटे इनकार, सबूत दिखाए तो बोली- हां, मैंने किया, जेल

जोधपुर@ जागरूक जनता. शहर के भीतरी इलाके में रहने वाली प्राइवेट स्कूल की एक टीचर के नाम से फर्जी आईडी बना भद्दे पोस्ट करने वाले इतने शातिर थे कि रात करीब 12 बजे वे यह काम शुरू करते। चार-पांच जनों का ग्रुप उससे जुड़ता और आपत्तिजनक शब्दों में भड़ास निकाल कर टीचर के रिश्तेदारों को टैग कर देते। दो-तीन घंटे बाद वो आईडी डिलीट कर देते थे। ऐसे में महिला शिक्षक सुबह तक जब पुलिस के पास पहुंचती, तो उन्हें बताने के लिए सबूत नहीं मिलते थे।

आरोपी छात्रा को सहपाठी ने अपने नाम से नई सिम लेकर दी थी, इसी से मैडम की फेक आईडी बना शुरू किया था बदनाम करने का अभियान

सिलसिला कई महीनों तक चला

सदर बाजार पुलिस के पास बार-बार शिकायत पहुंच रही थी। चूंकि, मामला इंटरनेट से जुड़ा था, तो साइबर एक्सपर्ट भी टीम में शामिल किए गए। टीम ने लगातार मॉनिटरिंग रखी। पीड़ित टीचर के परिवार वालों से निरंतर संपर्क में रही टीम को जैसे ही आधी रात को फर्जी आईडी बनने की जानकारी मिलती, वे सबूत जुटाने लग जाते। इंस्टाग्राम के नोएडा स्थित भारतीय कार्यालय से संपर्क किया, लेकिन बार-बार पुलिस की रिक्वेस्ट खारिज होती रही, क्योंकि सुबह तक वे सबूत ही गायब हो रहे थे। इसके बाद भी टीम ने हार नहीं मानी।

इंस्टाग्राम से सबूत मिले, तो आगे बढ़ी जांच

पुलिस की ओर से करीब एक दर्जन ईमेल इंस्टाग्राम को भेजी गई, तब कुछ सबूत मिले। इनसे आगे जांच की दिशा मिल गई। सिम की कंपनी का पता चला तो उसके मालिक की डिटेल और उपयोग करने वाले मोबाइल, नंबर और अन्य साक्ष्य भी मिले। इसी से इन्वेस्टिगेशन की दिशा तय हुई। सदर बाजार थानाधिकारी गजेंद्रसिंह के अनुसार तकनीकी स्तर पर जांच से ही केस आगे बढ़ा। कई पहलू पुलिस जांच का हिस्सा है, जिन्हें बताना उचित नहीं है। हालांकि, प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हो चुका है कि हेली ने अपने मोबाइल से फर्जी आईडी बनाई थी। उसे सिम क्लासमेट पंकज ने खुद के नाम से लेकर दी थी।

पंकज से पीयूष ले गया था सिम

पंकज के ताऊ ने बताया कि पंकज का दोस्त पीयूष सिम मांगकर ले गया था और कहा था- चलाकर दे दूंगा। पीयूष ने वह सिम मुंहबोली बहन को दे दी। 6 फरवरी को पीयूष सिम लौटा गया। इसके आधे घंटे बाद ही पुलिस घर पहुंच गई।

बच्चों की हरकत से परिजन भी व्यथित

सदर बाजार पुलिस ने हेली और पंकज को कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट के बाहर मीडियाकर्मियों की भीड़ थी। इससे व्यथित परिजनों की पीड़ा मीडिया पर नाराजगी के रूप में नजर आई। हेली की मां गुस्से में कुछ बोलने लगी तो वहां मौजूद रिश्तेदारों ने बीचबचाव कर उन्हें समझाया।

और भी लोगों के शामिल होने का संदेह

कोर्ट ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। सदर बाजार थानाधिकारी के अनुसार इस मामले में इंस्टाग्राम से कुछ और जानकारी जुटाई जा रही है ताकि किसी अन्य की इस प्रकरण में भूमिका के बारे में साक्ष्य मिल सके। पीड़िता ने कुछ अन्य लोगों के भी इस मामले में शामिल होने का संदेह जताया है, इसलिए विस्तृत पड़ताल की जा रही है। 

पुलिस ने की 6 घंटे तक पूछताछ

पुलिस : क्या तुम (टीचर का नाम) की स्टूडेंट रह चुकी हो ? 

छात्रा : हां, मैं ....मैम की स्टूडेंट रही हूं।

पुलिस : मैडम से कोई अनबन हुई थी ? 

छात्रा : नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।

पुलिस : क्या मैडम ने क्लास में सब बच्चों के सामने तुम्हें डांटा था? 

छात्रा : ऐसा नहीं है, लेकिन बच्चे कुछ गलत करते थे तो हर टीचर डांट लगाता ही है।

पुलिस : क्या तुमने मैडम को बदनाम करने की साजिश रची? 

छात्रा : नहीं, मैं ऐसा क्यूं करूंगी? मेरी मैडम से कोई दुश्मनी नहीं है।

पुलिस : क्या इंस्टाग्राम पर फेक आईडी बना मैडम को बदनाम नहीं किया ? 

छात्रा : नहीं सर, मैं जब कह रही हूं ऐसा कुछ नहीं किया तो आप बार-बार ये सवाल क्यूं कर रहे हैं? 

पुलिस : क्या ये तुम्हारा नाम नहीं है? क्या ये तुम नहीं हो? 

छात्रा : (कुछ देर चुप रही, फिर सिर झुका दिया, कुछ नहीं बोली) 

पुलिस : सब सबूत बता रहे हैं कि तुमने ही रंजिश से ऐसे मैसेज भेजे? 

छात्रा : सर...(फूट-फूट कर रोते हुए) हां, मैंने ही यह सब किया। 

पुलिस : मैडम को बदनाम करने के लिए तुमने ऐसा क्यों किया ? 

छात्रा : उन्होंने मेरी काफी स्टूडेंट्स के सामने बेइज्जती की, बस इसलिए कुछ मैसेज किए। 

पुलिस : ये सिम तुम्हारी नहीं है, तो किसकी है? 

छात्रा : ये सिम पंकज से मंैने एक साल पहले ली थी। 

पुलिस : क्या तुम्हें अपने पक्ष में कुछ कहना है या तुम मानती हो ये फर्जी आईडी बनाकर तुमने मैडम को बदनाम किया? 

छात्रा : हां, यह मैंने ही किया है ताकि मैडम बदनाम हो सके। 

पुलिस : तुमने ऐसा क्यों किया?  

छात्रा : मैडम ने दूसरे बच्चों के सामने मेरी इंसल्ट की थी। स्कूल में मैडम के बारे में किसी ने अफेयर की अफवाह फैला दी थी। टीचर ने इसका आरोप मुझ पर लगाया, जबकि मैंने ऐसा नहीं किया था। मेरे चरित्र पर भी कमेंट किए थे। इसलिए मुझे मैडम से नफरत हो गई।  

पुलिस : गलत बात के लिए डांटा था तो घरवालों या स्कूल प्रिंसिपल को शिकायत करती? 

छात्रा : (कुछ देर चुप्पी) हां, बता तो सकती थी, लेकिन गुस्सा ज्यादा आ रहा था। घरवाले या प्रिंसिपल भी पता नहीं मेरी बात मानते या नहीं। इसलिए दूसरा रास्ता अपना लिया।

साल भर तक मानसिक प्रताड़ना झेली : टीचर

एक टीचर के रूप में स्कूल में बच्चों को पर डांटना ही पड़ता है। ऐसे ही हेली को भी डांटा था, लेकिन उसे मैं भूल चुकी थी। कई महीनों से हेली की क्लास के छात्र मुझे बता रहे थे कि आपके बारे में इंस्टाग्राम पर ऐसा कुछ पोस्ट हो रहा है। शुरुआत में मैंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन लगातार पता चलने पर मैं परेशान रहने लगी। पोस्ट में लिखी काफी बातें हेली की मिलीभगत की तरफ इशारा कर रही थी। इस पर मैंने उसे अपने घर पर बुलाकर समझाया, लेकिन वह इनकार करती रही। उसकी हरकतें बढ़ती जा रही थीं। आखिरकार मैंने पुलिस को शिकायत की। पुलिस ने उसे पकड़ा तब भी उसके प्रति मेरी सहानुभूति रही, पर मैं क्या करती? मुझे लगता है कि अगर मैं यह कदम नहीं उठाती तो वो इससे भी ज्यादा कुछ कर सकती थी। मैं अब भी नहीं चाहती कि उसका भविष्य बर्बाद हो, इसलिए उसे माफ भी कर दूंगी। शुक्रवार को कोर्ट में भी मैंने जज मैडम से कहा था कि बच्चों की गलती पर डांटने पर टीचर को ही इस तरीके से बदनाम किया जाने लगे तो दूसरे बच्चों पर क्या असर पड़ेगा।

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