शठे शाठ्यम् समाचरेत्!

विनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत।

बोले राम सकोप तब, भय बिन होय न प्रीत।।

रामायत महाकाव्य मनुष्य जीवन के हर पहलु पर प्रकाश डालता है। संत तुलसीदासजी ने सुन्दर कांड में बड़ी सहज और सरलता से समझाया है कि शठ के साथ जब तक शठता से पेश नहीं आओगे। वह नहीं सुधरेगा। दूसरी तरफ उन्होंने लिखा है-

शठ सुधरहीं सतसंगति पाई।

पारस धातु कुधातु सुहाई।।

यहां पारस को माध्यम बनाकर कहा जा रहा है कि शठ सतसंगति पाकर सुधर जाता है। मगर हमारा पड़ौसी देश पाकिस्तान तो ऊपर वाली चौपाई का ही पात्र है। पिछले 70 सालों से उसे शांति के लिए समझाया जा रहा है। मगर उसकी समझ में ही नहीं आता। सन् 1947 में जिस वक्त भारत स्वतंत्र हुआ और भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ। तभी से वह लगातार भारत में अशांति फैला रहा है। सबसे पहले कश्मीर में कबाइलियों की घुसपैठ कराकर शुरुआत की थी, जो आजतक जारी है। उसका खामियाजा उसने 1971 की लड़ाई में अपना आधा पाकिस्तान गवां कर भी भुगत लिया। मगर उसकी हालत एक कुत्ते की पूंछ की तरह है जो हमेशा टेढ़ी रहती है। चाहे जितने दिन उसे पत्थर के नीचे दबाकर रखो। पत्थर हटाते ही वह टेढ़ी की टेढ़ी। ऐसा कहते हैं कि कुत्ते की पूंछ तभी सीधी होती है जब वह पागल हो जाता है। यानि की उसकी मौत उसका पीछा करने लग जाती है और वह दूसरों को काटने लग जाता है। शायद यही स्थिति अब पाकिस्तान की होने वाली हो। यह तो वक्त बताएगा। मगर पिछले 70 सालों से अशांति पैदा किए हुए है। हमारे वीर सैनिकों ने जो कार्रवाई की है। शायद पाकिस्तान को समझ आ जाए कि बहुत हो चुका। अब तो शांति से रहना सीख लें। वरना- 

होई सोई जो राम रचि राखा।

को करि तरक बढ़ावहीं शाखा।।

shivdayalmishra@gmail.com

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