जीएसटी घटने पर कंपनियों के लिए दाम कम करना जरूरी होगा

नई दिल्ली. जीएसटी लागू होने के बाद काउंसिल ने बहुत सी वस्तुओं पर टैक्स रेट में कटौती की है। लेकिन ग्राहकों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। लगातार ऐसी शिकायतें आने के बाद अब सरकार ऐसा फ्रेमवर्क बना रही है जिससे जीएसटी रेट में कटौती का ग्राहकों को पूरा फायदा मिल सके। अभी जीएसटी कानून में इसके लिए कोई तरीका तय नहीं है। कंप्लायंस के नियम नहीं होने के कारण कंपनियां टैक्स में कटौती का फायदा ग्राहकों को तत्काल नहीं देती हैं।

ग्राहकों को फायदा देने की समय सीमा तय हो सकती है

वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि रेट में कटौती के बाद ग्राहकों को लाभ देने की समय सीमा तय की जा सकती है। स्टॉक का भी ध्यान रखा जाएगा। प्रोडक्ट की पैकेजिंग बदलने और वजन बढ़ाने पर रोक लग सकती है।

अभी कंपनियां दाम घटाने के बजाय पैकेट का वजन बढ़ा देती हैं। अधिकारी ने कहा कि टैक्स रेट में कटौती के समय जो प्रोडक्ट बाजार में हैं, उनके दाम घटाना काफी हद तक डिस्ट्रीब्यूटरों और रिटेलरों पर निर्भर करता है। यह मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के हाथ में नहीं होता, जबकि इनपुट टैक्स क्रेडिट उन्हें ही मिलता है। जीएसटी कानून के तहत ग्राहकों को टैक्स में कटौती का लाभ दिलाने के लिए एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी का गठन किया गया है।

खामी क्या: मुनाफाखोरी जांचने का कोई तय तरीका नहीं, जुर्माने को कोर्ट में चुनौती देती हैं कंपनियां 

एफएमसीजी कंपनियों के खिलाफ ज्यादा शिकायतें 

जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ। नवंबर 2017 में पहली बार टैक्स में कटौती की गई। तब कहा गया कि पैकेट पर पुराने और संशोधित दोनों रेट होने चाहिए। इससे पता चलेगा कि दाम कितने घटाए गए हैं। लेकिन इसका पालन बहुत कम हुआ। ग्राहकों की ज्यादातर शिकायतें एफएमसीजी कंपनियों के खिलाफ हैं। हैंड वॉश, डियोड्रेंट और दूसरे कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट्स पर कंपनियों ने टैक्स की तुलना में दाम कम घटाए हैं।

एचयूएल पर जुर्माने के आदेश पर हाईकोर्ट ने स्टे लगाया 

नेशनल एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी ने पाया था कि देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) ने टैक्स में 383 करोड़ रुपए की बचत का फायदा ग्राहकों को नहीं दिया। कंपनी ने अपनी तरफ से अथॉरिटी के तहत बने कंज्यूमर वेलफेयर फंड में 160 करोड़ जमा कर दिए थे। इसलिए इस पर 223 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा रखी है। कंपनी ने कोर्ट में यही दलील दी कि अथॉरिटी ने ऐसा कोई पैमाना नहीं बनाया है जिससे पता चले कि ग्राहकों को लाभ दिया गया है या नहीं।

वेलफेयर फंड में पैसे जमा करने का है नियम 

जीएसटी कानून की धारा 171 के मुताबिक अतिरिक्त मुनाफे का पैसा ग्राहकों को वापस किया जाना चाहिए। जहां यह संभव न हो, कंपनी कंज्यूमर वेलफेयर फंड में पैसे जमा कराएगी। लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया है कि अतिरिक्त मुनाफे की गणना कैसे की जाए।

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