लापता पुलिसकर्मी को ढूंढ़ने की फरियाद करती रही पत्नी, पुलिस 10 दिन पहले ही दाह-संंस्कार कर चुकी थी

पटना पुलिस लाइन में तैनात जवान राजभवन में ड्यूटी देने 16 को घर से निकले तो वापस नहीं लौटे

17 जुलाई को मिला पुलिसकर्मी का शव, 20 को कर दिया अंतिम संस्कार, 30 तक परिजन जिंदा मान रहे थे 

पटना. पटना पुलिस का एक शर्मनाक चेहरा सामने आया है। एक पत्नी अपने गुम पुलिसकर्मी पति काे ढूंढती फिर रही थी, लेकिन पटना पुलिस ने अपने ही जवान के शव काे लावारिस मानकर 10 दिन पहले ही दाह संस्कार कर दिया था। अपने ही साथी के शव को पुलिस पहचान नहीं सकी। जिस शव को पुलिस ने अज्ञात समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, वह पुलिस लाइन में तैनात 45 साल के अशाेक पासवान का था।

अररिया के सिमराहा गांव के रहने वाले अशोक पत्नी आरती व बच्चों के साथ मंदिरी में रहते थे। अशाेक की पत्नी ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपाेर्ट भी दर्ज कराई थी। लेकिन, पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को 72 घंटे रखने के बाद दाह-संस्कार कर दिया था।

 

16 जुलाई को घर से निकले थे

जानकारी के मुताबिक, सिपाही अशोक पासवान 16 जुलाई को मंदिरी स्थित आवास से निकले थे। 16 को ही उन्हें राजभवन में रिपोर्ट करनी थी। उनकी पत्नी रीता व बच्चों ने साेचा कि वह राजभवन गए हैं। लेकिन, जब रात तक नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू हुई पर कोई सुराग नहीं मिला। इधर, गांधी मैदान थाने की पुलिस ने गांधी मैदान के पास से 17 जुलाई को एक अज्ञात लाश बरामद की।

पटना पुलिस ग्रुप के वाट्सएप पर डाल दिया

पुलिस ने मृतक अशोक का फोटो खींचकर पटना पुलिस ग्रुप के वाट्सएप पर डाल दिया जिसमें सभी अधिकारी व थानेदार हैं। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव गृह में लाश को रख दिया। 72 घंटे के बाद शव का दाह-संस्कार करा दिया। गांधी मैदान थानेदार सुनील कुमार सिंह ने बताया कि जो शव बरामद किया गया उसके नाक से खून गिर रहा था। वह ट्राउजर व टी-शर्ट पहने था। मोबाइल नहीं था। पॉकेट में 20 रुपए थे। उनकी पहचान नहीं हो सकी थी।

24 को पत्नी ने बुद्धा कॉलोनी में गुमशुदगी का केस दर्ज कराया 

अशोक का पुत्र 17 जुलाई को राजभवन गया जहां उन्हें रिपोर्ट करनाी थी। लेकिन, पता चला कि वह ताे यहां पहुंचे ही नहीं थे। इसके बाद परिजन, सगे-संबंधियों के यहां खोजबीन करने लगे। 22 जुलाई को पुलिस लाइन जाकर सार्जेंट मेजर आशीष कुमार को भी जानकारी दी। जब अशोक के बारे कुछ पता नहीं चला तो पत्नी रीता ने बुद्धा कॉलोनी थाने में गुमशुदगी की सूचना दी।

30 जुलाई को पता चला कि 20 को हो गया दाह-संस्कार 

परिजन लगातार बुद्धा कॉलोनी थाने का चक्कर लगा रहे थे। थानेदार रविशंकर सिंह ने बताया कि 30 जुलाई की रात को पटना पुलिस का बैक वाट्सएप मैसेज व फोटो देखना शुरू किया। इसी बीच उनकी नजर गांधी मैदान पुलिस द्वारा भेजे गए उस फोटो पर पड़ी। उन्होंने अशोक के बेटे को बुलाया और फोटो दिखाया तो उनकी पहचान हो गई।

बेटे का सवाल: पुलिस बताए, मेरे पिता की मौत कैसे हुई ? 

अशोक के बेटे ने सवाल उठाया कि पुलिस पहले यह जांच करे कि उनकी मौत कैसे हुई? क्या उनके साथ अनहोनी हुई है ? पुलिस की लापरवाही से पहचान नहीं हो सकी।

एसएसपी की सफाई: कोई लापरवाही नहीं हुई

एसएसपी गरिमा मलिक ने कहा कि अशोक की लाश सादी वर्दी में मिली थी। उनके पास कोई पहचान पत्र भी नहीं था। मोबाइल भी नहीं था। पुलिस ने फोटो डाली थी। लेकिन, पहचान नहीं हो सकी।

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