यातायात नियमों के उल्लंघन की जुर्माना राशि लेने-देने में पड़ेगी भारी!

वर्तमान समय में कोई भी चीज सस्ती नहीं है। जब जीवन ही सस्ता नहीं है उसको गुजर-बसर करने के लिए न जाने कितनी जद्दोजहद करनी पड़ती है। और उसी जीवन को सुचारू और समय बचाकर जीने के लिए वाहनों की आवश्यकता हुई। वरना तो पैदल और बैलगाड़ी के जमाने से हम कहां आ पहुंचे हैं। यह जीवन की जद्दोजहद का ही तो नतीजा है। मगर शहरों की सड़कों पर और एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले वाहनों की बढ़ती भीड़ को सुचारू चलाने के लिए कुछ नियम कायदे भी बना दिए गए। उन नियम-कायदों के अनुसार नहीं चलने पर यातायात पुलिस वाहन चालकों से जुर्माना वसूल करती है। ताकि जुर्माना भरने के डर से वह नियम-कायदों के अनुसार ही वाहन चलाए। मगर जिस प्रकार 1 सितम्बर 2019 से यातायात नियमों की अनदेखी करने पर जो जुर्माना राशि तय की गई है। वह समझ से परे है। जिस प्रकार जुर्माना राशि का निर्धारण किया गया है उससे तो लगने लगा है कि वाहन चलाना अब हर किसी के बूते के बाहर हो जाएगा। क्योंकि अगर पुलिस को अपना टारगेट पूरा करने के लिएजुर्माना वसूलना होगा तो वह यातायात के बहुतेरे नियम हैं उनमें से किसी भी नियम के उल्लंघन को दर्शाकर पैसा वसूलेंगे। जैसे-नंबर प्लेट टूटी है, इंडीकेटर सही नहीं है। लाइट टूटी है। लाइट का फोक्स सही नहीं है। गति तेज है, कभी-कभार गाड़ी के कागजात साथ नहीं होते। हेलमेट टूटा है। हेलमेट आईएसआई मार्का नहीं है। ऐसे बहुत से कारण हैं जिनके कारण यातायात पुलिस जुर्माना लगा सकती है। कई बार इमरजेंसी में दो  के बजाए तीन सवारियां भी बैठाली जाती है। ऐसे बहुत से कारण पुलिस के लिए जुर्माना वसूलने का रास्ता खोले हुए हैं। पुलिस को अगर चाहिए कि सब नियम कायदों से वाहन चलाएं तो वास्तविक केस को छोड़कर वाहन को 4-6 दिन के लिए जब्त करले, फिर छोड़ दे बिना कोई शुल्क लिए या फिर कुछ टोकन मनी राशि तय कर दे। ताकि वाहन चालक को आने-जाने में परेशानी होगी तो अपने आप कायदे से चलेगा। वरना तो यह वसूली के जरिए टारगेट पूरा करना ही माना जाएगा। दूसरी तरफ अगर वाहनचालक के पास जुर्माना राशि के एक हजार रुपए बन रहे होते हैं तो वह 200-400 या 500 रुपए ऊपर के ऊपर देकर अपना पिंड छुड़ाना चाहेगा, जिससे वह पैसा सीधे पुलिस जवान की जेब में जाएगा। तो ये भी गलत होगा। सुधार के बजाए भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा देगा। वर्तमान में लोगों की जेब में 100-200 रुपए होते हैं और वह हजारों में जुर्माना कहां से भरेगा। इस दौरान पुलिस और वाहनचालक के बीच आए दिन के झगड़े और झंझट भी पैदा होने लगेंगे। 

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