जो पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकता, उसको सीधे मेयर बनाना गलत, फैसले पर पुनर्विचार हो-पायलट

पायलट ने कहा - ये निर्णय मंत्रालय ने लिया है, इसकी केबिनेट में चर्चा नहीं हुई

धारीवाल ने बोले- कैबिनेट की जरूरत नहीं, विभाग के पास पावर 

जयपुर. निकाय चुनाव में महापौर-सभापति सहित अन्य निकाय प्रमुखाें के चयन के तरीके पर गहलाेत सरकार अपनों से ही घिरती जा रही है। एक दिन पहले दो कैबिनेट मंत्रियों के सवाल उठाने के बाद अब डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी इस िनर्णय के विरोध में उतर अाए हैं।

पायलट ने कहा है कि मेयर-सभापति चुनने के हाईब्रिड तरीके पर न ही विधायक दल बैठक में चर्चा हुई, न ही सदन या कैबिनेट में। मंत्री महोदय यदि नगरपालिका एक्ट के तहत यह निर्णय लेना चाहते हैं तो यह न तो व्यावहारिक रूप से सही है, न ही राजनीतिक दृष्टिकोण से। इस निर्णय में बदलाव की जरूरत है। इसमें बैकडोर एंट्री होगी। इसमें लोकतंत्र को मजबूत करने वाली बात नहीं होगी। कांग्रेस ने हमेशा कहा है कि सीधा चुनाव हो, जनता से सीधा जुड़ाव हो। हमने पहले सीधे जनता की अाेर से निकाय प्रमुख चुनने की बात कही थी, लेकिन उसको बदल दिया गया। यहां तक ताे ठीक था, लेकिन पार्षद का चुनाव लड़े बिना या जीते बिना किसी काे भी मेयर-सभापति बनाना गलत है। बता दें कि एक दिन पहले गुरुवार काे ही खाद्य एवं नागरिक अापूर्ति मंत्री रमेश मीना और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी मेयर-सभापति चुने जाने संबंधी नए नियम का विराेध किया था। उन्हाेंने इसे फील्ड में काम करने वाले और चुनाव जीतकर आने वाले पार्षदों के साथ अन्याय बताया था।

विवाद पर यूडीएच मंत्री का जवाब

यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने निकाय प्रमुखों के चुनाव के तरीकों पर सवाल उठा रहे मंत्री, डिप्टी सीएम और भाजपा को जवाब दिया। वे बोले- 31 जनवरी 2019 को सरकार ने आते ही भाजपा के नियम को बदलकर किसी भी व्यक्ति के निकाय प्रमुख का चुनाव लड़ सकने का रूल लागू किया था। अभी कुछ नहीं बदला, केवल 16 अक्टूबर 2019 को वही अधिसूचना चुनाव के समय दुबारा जारी की तो हंगामा क्यों? नाै माह तक मंत्री और नेता कहां गए थे। राजस्थान म्यूनिसपल एक्ट 2009 में रूल 3, 5, 6 और 10 में विभाग के पास शक्तियां हैं। ये मामले कैबिनेट में जाते ही नहीं हैं। 

एकतरफा निर्णय थोपा, सरकार दो भागों में बंटी : भाजपा

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि सरकार के टुकड़े साफ दिखाई दे रहे हैं। मंत्री और उपमुख्यमंत्री सरकार के निर्णय के खिलाफ हैं। जिस घर में झगड़ा हो, बंटवारा होता है। वह जनता का भला नहीं कर सकता। उपमुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि उनको भी फैसले की जानकारी नहीं थी और ना ही कैबिनेट में चर्चा हुई। सरकार ने एकतरफा निर्णय किया है।

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